सेक्स के 9 अनकहे मिथकों की सच्चाई हर किसी को पता होनी चाहिए

Updated on 19 Aug, 2018 at 1:39 pm

सेक्स को लेकर भले ही लोगों की झिझक थोड़ी खुली है, लेकिन अब भी इस मुद्दे पर सही जानकारी का अभाव है, क्योंकि घर के बड़े बच्चों से इस बारे में बात नहीं करते और बच्चे जब युवावस्था में पहुंचते हैं, तो इंटरनेट पर मिली सतही जानकारी उन्हें गलत राह पर ले जाती है। सही सेक्स शिक्षा न मिलने की वजह से ही आज तक सेक्स को लेकर बहुत से मिथक है, जिन्हें लोग सच मानते हैं।

 

1. मिथक- महिलाओं के प्राइवेट पार्ट से निकलने वाला तरल पदार्थ फीमेल इजेक्यूलेशन है।

 

 

सच्चाई- दरअसल, यदि महिलाएं एक से ज़्यादा बार ऑर्गेज्म का अनुभव करती हैं तो प्राइवेट पार्ट से ज़्यादा तरल पदार्थ आ सकता है।

 

2. मिथक- कॉन्डम के आगे की अतिरिक्त जगह इसलिए होती है ताकि बिना फटे ज़्यादा सीमेन इकट्ठा हो सके।

 

 

सच्चाई- अलग-अलग ब्रांड के कॉन्डम की फिटिंग थोड़ी अलग होती है। अतिरिक्त जगह कंफर्ट के लिए होती है, ताकि ये आसानी से फिट हो सके।

 

3. मिथक- ओवरी इन्फेक्शन को विज्ञापनों में सही तरह से दिखाया गया है।

 

 

सच्चाई- सेक्स सिर्फ रोमांस तक ही सीमित नहीं होता। आपके लिए अपने प्रजनन अंगों की स्वच्छता और स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी उतना ही ज़रूरी है।

 

4. मिथक- वजाइनल बर्थ से किसी को एचआईवी हो सकता है, एड्स नहीं।

 

 

सच्चाई- दरअसल, एचआईवी एक वायरस है और एड्स सिंड्रोम। एचआईवी वायरस ही एड्स के लिए ज़िम्मेदार हैं।

 

5. मिथक-  इंफेक्शन के दौरान सेक्स से कोई फर्क नहीं पड़ता।

 

 

सच्चाई- प्राइवेट पार्ट में इंफेक्शन होने पर सेक्स से परहेज़ करें, वरना इंफेक्शन फैल सकता है।

 

6. मिथक- पीरियड्स के दौरान एंटीबायोटिक लेने से बर्थ कंट्रोल पिल्स का असर खत्म हो जाता है।

 

 

सच्चाई- कोई भी दवा लेने से पहले डॉक्टर से पूछ लें। कुछ एंटीबायोटिक्स का असर हार्मोन्स पर होता है और इसके साथ बर्थ कंट्रोल पिल्स लेने पर साइड इफेक्ट्स हो सकता है।

 

7. मिथक- ओरल सेक्स से हर्प्स हो सकता है जो जननांगों में फैल जाता है।

 

 

सच्चाई- टेस्ट पॉज़िटिव होने पर भी हर्प्स निर्धारित नहीं होते। इसके लिए आपको असुरक्षित ओरल सेक्स की निरंतरता का पता लगाना होगा।

 

8. मिथक- अतरंग पलों के बाद यूरिनेट करने से बैक्टीरिया और फैलता है।

 

 

सच्चाई- सेक्स के बाद यूरिन पास करने से आप सेक्सुअली ट्रांस्मिटेड डिसीज़ से बच सकते हैं।

 

9. मिथक- यदि संयम से न किया जाए तो मास्टरबेशन अनहेल्दी होता है।

 

 

सच्चाई- अध्ययन के अनुसार, महीने में 21 बार मास्टरबेशन करने से प्रोस्टेट कैंसर का खतरा 33 प्रतिशत तक कम हो जाता है।

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