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यकीनन आप नहीं जानते होंगे ताजमहल से जुड़े ये 7 रहस्य!

Updated: 5:22 pm 30 Oct, 2017

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विश्व के सात अजूबों में से एक और दुनियाभर में प्यार की निशानी के रूप में मशहूर खूबसूरत ताजमहल तो देखने की ललक हर किसी को होती है। जिन्होंने ताज का दीदार कर लिया है वो अपने आप को खुशकिस्मत मानते हैं कि उन्होंने प्यार की इस आलीशान निशानी को अपनी आंखों से देख लिय। वैसे सारी दुनिया में अपनी खूबसूरती और भव्यता के लिए मशहूर ताजमहल के अंदर भी ढेर सारे कई ऐसा राज़ दफन है, जिसके बारे में शायद ही कोई जानता है। ताजमहल के कई कमरे बरसों से बंद हैं और इन्हीं बंद कमरों के पीछे छुपे हैं कई राज़।

कहा जाता है कि वर्ष 1631 में मुगल बादशाह शाहजहां ने अपनी कई पत्नियों में एक मुमताज महल की याद में संगमरमर का यह आलीशान मकबरा बनवाया। इसे बनने में 20 साल का समय लगा और करीब 1000 हाथी और 20 हजार मज़दूरों की कड़ी मेहनत के बाद आलीशान ताजमहल का निर्माण हुआ, जो आज पूरे विश्व के लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। हालांकि,  इस ऐतिहासिक धरोहर से जुड़ी बहुत सी ऐसी दिलचस्प बातें हैं, जिनके बारे में लोगों को पता नहीं है।

मुगलों की बर्बरता छुपाने की कोशिश!

माना जाता है कि संगमरमर की इस सरंचना के नीचे एक सीलबंद दीवारों से घिरा कच्चा दरवाज़ा है, जिस पर प्लास्टर नहीं हुआ है। कहते हैं कि मुगल बादशाह शाहजहां ने मुगलों की बर्बरता के निशान छुपाने के लिए इस दरवाज़े को सील करवा दिया। यह मानने वालों की भी कमी नहीं है कि ताजमहल को बनवाने के लिए हिंदू मंदिर को तोड़ा गया और उसे दीवारों से घेरकर छुपाने की कोशिश की गई थी।

रहस्यमी 1089 कमरे

ऐसा कहा जाता है कि ताज के गलियारे के सबसे गहरे रास्ते में यदि आप बारीकी से जांच करें तो आप पाएंगे कि ऊपर के मेहराब और आयताकार वेंटिलेटर को अलग-लग तरह के संगमरमर और टिंट्स से बंद कर दिया गया है। ये मेहराब आपको गुप्त सीढ़ियों तक ले जाता हैं। दरअसल, इन मेहराबों के पीछे 1089 रहस्यमयी कमरे हैं। चूने और ईंटों से इन दरवाजों को बंद किया गया है।

पहली मंजिल के बंद कमरे

यदि आप कभी ताजमहल गए हैं, तो आपने देखा होगा कि पहली मंजिल पर जाने वाली सीढ़ियां सील की हुई हैं। ऐसा माना जाता है कि ये सीढ़ियां शाहजहां के जीवनकाल से ही बंद हैं। कहा जाता है कि शाहजहां ने ही कब्र बनवाने और कुरान की नक्काशी के लिए पहली मंजिल पर बने कमरों से संगमरमर निकलवा दिए थे, क्योंकि उसे नहीं पता था कि ताजमहल के बाकी हिस्सों से मैच करता संगमरमर कहां से खरीदना है।

नदी किनारे से मुमताज़ के कब्र का नज़ारा बेहतरीन दिखता है!


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आमतौर पर सैलानी मुमताज़ महल की कब्र को अंदर से देखना पसंद करते हैं, लेकिन इसे नदी किनारे से देखने पर ये और ज़्यादा खूबसूरत दिखता है। यदि कोई पूरे ताज़ का बारीकी से निरीक्षण करे तो उसे चार मंजिलें ताजमहल में दो और मंजिल नज़र आएगी, जो लालरंग के बालुई पत्थर से बनी हुई है। यदि आर्किटेक्ट गहन परीक्षण करें तो उन्हें पता चलेगा कि यहां पर कई गुप्त कमरे हैं जो सदियों से लोगों की नज़रों से बचे हुए हैं।

ताजमहल के कमरों की दीवारों पर है हिंदू भित्ति चित्र

इस चित्र में आप संगमरमगर प्लैटफॉर्म के नीचे ताजमल के रहस्यमयी कमरों का किनारा देख सकते हैं। शाहजहां ने इन कमरों को पूरी तरह से सील तो करवा दिया था, लेकिन प्लास्टर करवाना भूल गया। अक्सर ये सवाल उठता है कि अगर शाहजहां ने एक मकबरे के रूप में ताजमहल बनवाया था, तो इतने कमरों की क्या ज़रूरत थी और यदि कमरे बनवाएं तो उन्हें लोगों से छुपाकर क्यों रखा?

कमरे की छतों पर हिंदू स्टाइल की पेंटिंग है

कमरे की छतों को ध्यान से देखने पर आपको वहां हिंदू स्टाइल वाली पेंटिंग दिखेगी। यदि शाहजहां ने इन हिस्सों का निर्माण करवाया है तो यहां हिंदू चित्र क्यों है? कहीं ऐसा तो नहीं कि शाहजहां ने इन हिस्सों का निर्माण ताज बनवाने के पहले ही करवाया था। यदि कोई पुरातत्व विभाग को मनाकर इन कमरों पर लगे ताले हटवा दे तो वो खुद भी इन चित्रों को देख सकता है। लेकिन यहां हिंदू चित्र क्यों और कैसे बने है इस सवाल का जबाव हमेशा रहस्य ही बना रहेगा।

गुप्त कमरों के गलियारों में भी हिंदू चित्र और वास्तुकला दिखते हैं

22 बंद किए हुए कमरों के भीतरी किनारों पर लगभग 12 फुट चौड़ा और 300 फीट लंबा गलियारा है. यहां ध्यान से देखने पर आपको हिंदू चित्र और डिज़ाइन दिखेंगे। आगे फिर से पूरे गलियारे में अंधेरा है यहां वेंटीलेशन और लाइट नहीं है।

ये पढ़ने के बाद आपके मन में भी कई सवाल उठ रहे होंगे कि क्या भारतीय पुरातत्व विभाग भी लोगों से कुछ छुपा रहा है या फिर ताजमहल से जुड़े रहस्य मात्र लोगों की कोरी कल्पना हैं?

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