फर्जी है नेताजी को ‘युद्ध अपराधी’ बताने वाली चिट्ठी: पहले भी सोशल मीडिया में हुई थी सर्कुलेट

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Updated on 11 Jul, 2016 at 5:11 pm

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नेताजी सुभाष चन्द्र बोस को युद्ध अपराधी बताने वाली तथाकथित चिट्ठी फर्जी  बताई जा रही है। यह चिट्ठी पिछले कई महीने पहले भी सोशल मीडिया पर सर्कुलेट हुई थी। नेताजी के 119वें जन्मदिन के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तरफ से जारी की गई फाइलों में पूर्व प्रधानमंत्री नेहरू की तरफ से एक कथित पत्र लिखे जाने की बात सामने आई थी, जिसकी प्रतिलिपी सोशल मीडिया पर सर्कुलेट होने लगी।

इस चिट्ठी पर जवाहरलाल नेहरू का नाम ‘ज्वाहरलाल’ नेहरू लिखा हुआ है, जो गलत है। इसके अलावा भी इस चिट्ठी में कई तथ्यात्मक त्रुटियां हैं। इस चिट्ठी में सुभाष चन्द्र बोस और ब्रिटिश प्रधानमंत्री के निवास 10 डाउनिंग स्ट्रीट की स्पेलिंग भी गलत लिखी गई है। चिट्ठी पर जवाहरलाल नेहरू के हस्ताक्षर नहीं हैं। सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे इस पत्र पर नेशनल आर्काइव्स ऑफ इन्डिया का वाटर मार्क नहीं है, जबकि अन्य दस्तावेजों पर वाटरमार्क है।  इसलिए माना जा रहा है कि यह चिट्ठी सोशल मीडिया पर महज दुष्प्रचार के लिए सर्कुलेट किया गया है।

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गत वर्ष प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नेताजी के परिजनों को भरोसा दिलाया था कि भारत सरकार के पास उपलब्ध सीक्रेट फाइलों को नेताजी की जयन्ती यानि 23 जनवरी को सार्वनजिक कर दी जाएंगी। इसी क्रम में भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस से संबंधित 25 फाइलों की डिजिटल कॉपी को हर महीने सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध कराने की योजना बनाई है। इससे नेताजी के लापता होने की घटना पर प्रकाश डाला जा सकेगा।



इस बीच बताया गया है कि नेताजी सुभाष चन्द्र बोस से जुड़ी 41 में से 5 फाइलें इतनी सीक्रेट हैं कि पीएमओ उनका सब्जेक्ट बताने को भी राजी नहीं हुआ। तीन अन्य फाइलें भी पब्लिक नहीं हुईं हैं। माना जाता है कि ये नेताजी की पत्नी और बेटी से जुड़ी हैं।

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की जयन्ती के अवसर पर उन्हें श्रद्धान्जलि देते हुए कहा कि भारतीयों की पीढियां उन्हें उनके देशभक्ति और बहादुरी के लिए याद करती हैं।


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