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क्या आपने कभी सोचा है कि जूतों की लेस बार-बार खुल क्यों जाती है?

Published on 7 October, 2017 at 5:30 pm By

कई बार आपने देखा होगा कि बार-बार बांधने के बावजूद थोड़ी दूर जाने पर जूतों की लेस खुल जाती है, लेकिन ऐसा क्यों होता है, क्या इस बारे में आपने कभी सोचा है? अक्सर लोग कहते हैं कि अरे यार ये लेस क्यों बार-बार खुल जाती है, मगर उन्हें इस क्यों का जवाब पता नहीं होता. इस क्यों का जवाब ढूंढ़ निकाला है बर्केली मैकेनिकल इंजीनियर्स की एक टीम ने।


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आप सोच रहे होंगे कि ऐसा क्या हुआ होगा जिसने बर्केली मैकेनिकल इंजीनियर्स की टीम को इस सवाल का जवाब ढूंढ़ने पर विवश कर दिया कि आखिर जूतों की लेस खुल क्यों जाती है।

Shoelace untied

साइंटिफिक अमेरिकन ओलिवर ओरिली के मुताबिक, कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में मैकेनिकल इंजीनियरिंग के एक प्रोफेसर एक दिन अपनी बेटी को जूते की लेस बांधना सिखा रहे थे। तभी उन्हें महसूस हुआ कि आखिर जूतों की लेस खुल क्यों जाती है। जब उन्होंने इस सवाल का जवाब तलाशना शुरू किया तो पता चला कि इस बारे में किसी को कुछ नहीं पता है। फिर उन्होंने अपने दो पीएचडी स्टुडेंट ई ग्रेग और क्रिस्टोफर की मदद से इस सवाल का जवाब ढूंढ़ने की कोशिश की।



न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक मिस ई ग्रेग ने बताया कि, वो लोग इस सवाल का जवाब ढूंढ़ने के लिए हफ्तों तक हॉल में चलते रहे और जूतों की लेस के खुलने का इंतज़ार करते रहे। इतना ही नहीं वो घंटों टेबल के सामने बैठे रहते, अपने पैर हिलाते और देखते की क्या उनके मूवमेंट का जूतों की बंधी हुई लेस पर कोई असर हो रहा है, मगर ये सब करके उन्हें कुछ हासिल नहीं हुआ।

लेकिन आखिरकार एक दिन कुछ ऐसा हुआ जिसने सबको चौंका दिया. जब ग्रेग ट्रेडमील पर दौड़ रही थी तो उनके पैरों की फोर्स की वजह से जूतों की लेस खुल गई. रिसर्चर्स ने इसके बाद ग्रेग के दौड़ने वाली जगह पर हाई स्पीड कैमरा लगाकर उसे रिकॉर्ड किया. साथ ही जूतों की लेस में एक्सेलेरोमीटर लगाया गया ताकि पैरों की फोर्स को मापा जा सके।

द प्रोसीडिंग्स और द रॉयल सोसाइटी में छपे आर्टिकल में शोधकर्ताओं बताया कि ये अचानक हुई घटना है। स्लो मोशन फुटेज जिसमें ट्रेडमील पर दौड़ने वाले शख्स के जूतों की लेस पर फोकस किया गया है, को देखकर पता चलता है कि एक या दो स्टेप दौड़ने के बाद ही लेस ढीली हो जाती है। शोध के मुताबिक कई तरह के दबाव की वजह से जूसों की लेस खुल जाती है। बार-बार दौड़ने की वजह से लेस ढीली हो जाती है, जबकि बार-बार दिशा बदलने की वजह से वो खुल जाती है।


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