इन 10 भारतीय रीति-रिवाज़ों के पीछे हैं वैज्ञानिक कारण

Updated on 22 Feb, 2018 at 5:08 pm

Advertisement

हर संस्कृति के कुछ अपने रीति-रिवाज़ होते हैं और लोग सदियों से उसे मानते आ रहे हैं। हमारे हिंदू धर्म में भी पैर छूने से लेकर सिंदूर लगाने तक सैकड़ों रीति-रिवाज़ हैं जिन्हें लोग न जाने कब से फॉलो करते आ रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इनके पीछे सिर्फ़ धार्मिक कारण ही नहीं है, बल्कि इन रीति-रिवाज़ों को मानने के वैज्ञानिक कारण भी हैं।

1. नमस्ते

किसी से मिलने पर हम हाथ जोड़कर नमस्ते करते हैं। ऐसा करते समय हमारे दोनों हाथ की उंगलियां आपस में जुड़ती हैं और उन पर दबाव पड़ता है, जिसका सकारात्मक असर हमारे दिमाग पर होता है। इससे याददाश्त बढ़ती है और आप शांति महसूस करते हैं।

2. मंदिर में घंटी बजाना

मंदिर में घंटी बजाना श्रद्धा के साथ ही विज्ञान से भी जुड़ा है। मंदिर की घंटियां कई तरह के धातु से मिलकर बनी होती हैं। जब घंटी बजाते हैं तो जो आवाज़ निकली है उसकी प्रतिध्वनी करीब 7 सेकंड तक शरीर के सातों चक्र को छूती है, जिससे आपकी एकाग्रता की शक्ति बढ़ती है। आप किसी काम पर अच्छी तरह ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।

3. पूजा में सिल्क के कपड़े पहनना

माना जाता है कि सिल्क में इलेक्ट्रो मैग्नेटिक एनर्जी को आकर्षित करने की शक्ति होती है। जब आप सिल्क के कपड़े पहनकर पूजा करते हैं तो पूजा के दौरान सकारात्मक ऊर्जा का आपके अंदर समावेश होता है, जिससे आपको शांति का अनुभव होता है और आप एकाग्र भाव से पूजा करते हैं।

4. शादीशुदा महिलाओं का सिंदूर लगाना

हिंदू धर्म में हर शादीशुदा महिला का माथे पर सिंदूर लगाना अनिवार्य होता है। सिंदूर हल्दी और मर्करी से मिलकर बनता है। इसे लगाने से ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है और ये कामेच्छा भी बढ़ाता है। विधवा महिलाओं को सिंदूर लगाने की मनाही होती है। सिंदूर लगाने से तनाव भी कम होता है।

5. चूड़ी पहनना


Advertisement

चूड़ी भी सुहाग की निशानी मानी जाती है। माना जाता है कि जब चूड़ियां आपस में टकराती है तो वह ध्वनि घर से नकारात्मक ऊर्जा को बाहर करने में मदद करती है। प्राचीन आयुर्वेद के अनुसार महिलाओं की हड्डियां पुरुषों से कमज़ोर होती हैं, इसलिए पुराने ज़माने में सोने-चांदी की चूड़ियां महिलाओं को पहनाई जाती थी, ताकि ये धातु ऊर्जा अवशोषित करके महिलाओं के शरीर में पहुंचा सकें। साथ ही पहले पल्स यानी नाड़ी से रोगों का पता लगाया जाता था। चूड़ी पहनने पर ये महिलाओं की कलाई पर रगड़ खाती रहती है, जिससे ब्लड सर्कुलेशन ठीक रहता है।

6. बिछुआ पहनना

सिंदूर की तरह ही शादीशुदा महिलाओं को बिछुआ पहनना भी ज़रूरी होता है, लेकिन इसे पहनने के पीछे वैज्ञानिक कारण भी है। बिछुआ पैर की दूसरी उंगली में पहना जाता है, जो नर्व के ज़रिए यूटरस और दिल से जुड़ा होता है।  बिछुआ पहनने पर पैर की उस उंगली पर दबाव पड़ता है जिससे यूटरस मज़बूत होता है और मासिक धर्म के दौरान ब्ल्ड सर्कुलेशन भी ठीक रहता है। चांदी ज़मीन से ऊर्जा को अवशोषित करके आपके शरीर में पहुंचाती है।

7. शुभकार्य में हल्दी का इस्तेमाल

हल्दी का इस्तेमाल हमारे यहां हर शुभ काम में होता है चाहे वो पूजा हो या शादी-ब्याह। दरअसल, हल्दी में एंटीऑक्सीडेंट और एंटी इन्फ्लामेट्री गुण होते हैं। हमारे देश में सदियों से हल्दी का इस्तेमाल दवा के रूप में हो रहा है। हल्दी कैंसर, अल्ज़ाइमर, डायबिटीज़ और आर्थराइटिस जैसी बीमारियों को दूर करने में भी मददगार है।

8. ओम् का उच्चारण

ओम की प्रतिध्वनि आपके मन और दिमाग को शांत करती है। इसे ब्रह्मांड की पहली मौलिक ध्वनि माना जाता है। इसे बोलते समय हमारे शरीर के तीन हिस्सों पेट, छाती और चेहर पर ज़ोर पड़ता है। ओम् के जाप से आपके दिमाग में आ रहे बेकार के विचारों पर विराम लगता है और आप शांति का अनुभव करते हैं।

9. ज़मीन पर बैठकर खाना

हमारी संस्कृति में ज़मीन पर बैठकर भोजन करने की परंपरा है। विज्ञान के अनुसार ज़मीन पर दोनों पैरों को मोड़कर बैठकर खाना खाने से पाचनतंत्र ठीक रहता है। साथ ही बार-बार बैठने और उठने से जॉइंट्स भी मज़बूत और लचीले होते हैं।

10. भोजन की शुरुआत तीखे से अंत मीठे से

आपने ध्यान दिया होगा कि खाना खाने के बाद हमारी संस्कृति में मीठा खिलाने का रिवाज़ है। इसके पीछे भी वैज्ञानिक कारण है, दरअसल, तीखा खाना खाने के बाद पेट में पाचन रस और एसिड सक्रिय हो जाते है जिससे पेट में जलन हो सकती है। मीठा खाने के बाद पाचन धीरे-धीरे होता है और पेट में जलन भी नहीं होती।

Advertisement

आपके विचार


  • Advertisement