इन 10 हिंदू परंपराओं के पीछे हैं वैज्ञानिक कारण, आप भी जानिए

Updated on 1 Dec, 2017 at 1:25 pm

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हिंदू धर्म में ढेर सारे रीति-रिवाज हैं। कुछ लोग इन्हें अंधविश्वास और पिछड़ी सोच बताते हैं, तो कुछ इन्हें दिल से मानकर अपनाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन रिवाज़ों के पीछे वैज्ञानिक कारण भी हैं?

1. नमस्ते

 

किसी से मिलने पर हमारी संस्कृति में हाथ जोड़कर नमस्ते करने की परंपरा है, लेकिन इसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी है। दरअसल, जब सभी उंगलियां आपस में जुड़ती हैं तो उन पर दबाव पड़ता है एक्यूप्रेशर के कारण उसका सीधा असर हमारी आंखों, कानों और दिमाग पर होता है। इसके अलावा नमस्ते करने ने दूसरे के हाथों को स्पर्श नहीं होता, इससे आप कीटाणुओं के संपर्क में आने से भी बच जाते हैं।

2. पीपल के पेड़ की पूजा

 

हिंदू धर्म में महिलाएं पीपल के पेड़ की पूजा करती हैं। ऐसा माना जाता है कि इससे भूत-प्रेत दूर होते हैं, लेकिन इसके पीछे साइंटिफिक कारण भी है, जिसके अनुसार पीपल के पेड़ की पूजा इसलिए की जाती है की जाती है, ताकि इस पेड़ के प्रति लोगों का सम्मान बढ़े और वो पेड़ को काटे नहीं। पीपल एक मात्र ऐसा पेड़ है, जो रात में भी ऑक्सीजन छोड़ता है।

3. तिलक लगाना

 

किसी भी शुभ काम में माथे पर तिलक लगाया जाता है। ऐसा करने से आंखों के बीच में मौजूद नस की ऊर्जा बनी रहती है। जब अंगूठे से माथे पर तिलक लगाया जाता है तो उस पर दबाव पड़ता है इससे चेहरे को खून की सप्लाई करने वाली मांसपेशियां एक्टिव हो जाती हैं और स्किन सेल्स तक ब्लड अच्छी तरह पहुंचता है।

4. कान छिदवाना

 

वैसे तो सिर्फ लड़कियों के ही कान छिदवाए जाते हैं, मगर कई राज्यों में लड़कों के कान छिदवाने की भी परंपरा है। वैज्ञानिकों के मुताबिक इससे स्मरण शक्ति बढ़ती है। डॉक्टरों का मानना है कि इससे कान से होकर दिमाग तक जाने वाली नस में ब्लड फ्लो ठीक तरह से होता है।

5. ज़मीन पर बैठकर खाना

 


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अब भले ही शहरों मे डायनिंग टेबल का चलन शुरू हो चुका है, लेकिन हमारी संस्कृति में ज़मीन पर पालथी मारकर बैठकर खाने की ही परंपरा रही है। पालथी मारकर बैठना एक प्रकार का योगासन है। इस पोज़ीशन में बैठने से दिमाग शांत रहता है और खाना खाते समय यदि दिमाग शांत रहे तो भोजन अच्छी तरह पच जाता है।

6. सिंदूर लगाना

 

हिंदू धर्म में शादीशुदा महिलाओं के लिए सिंदूर लगाना अनिवार्य होता है। इसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी है। सिंदूर में हल्दी, चूना और मरकरी होता है जो ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखता है। इतना ही नहीं इससे यौन उत्तेजना भी बढ़ती है इसलिए विधवा महिलाओं को सिंदूर लगाने की मनाही होती है।

7. चूड़ी पहनना

 

चूड़ी सुहाग की निशानी मानी जाती है। इसके अलावा चूड़ी पहनने के पीछे वैज्ञानिक कारण भी है। जब हाथों में चूड़ी पहनने पर हो त्वचा से रगड़ची हो तो इससे जो ऊर्जा पैदा होती है वो ब्लड फ्लो को ठीक रखी है।

8. सूर्यनमस्कार

 

हिंदू धर्म में सूर्य को देवता का दर्जा दिया गया है और उनकी पूजा की जाती है। सुबह सूर्यनमस्कार करने और उन्हें जल चढ़ाने की परंपरा है। ऐसा करने से पानी के बीच से ने वाली सूर्य की किरणे जब आंखों से टकराती है तो इससे आंखों की रोशनी अच्छी होती है।

9. शिखा रखना

 

ब्राह्मण लोगों के सिर पर छोटी होती है। आज भी पंडितों के सिर पर शिखा यानी चोटी होती है। इसके पीछे वैज्ञानिक तर्क यह है कि चोटी वाली जगह पर दिमाग की सारी नसें आकर मिलती हैं। इससे दिमाग स्थ‍िर रहता है और इंसान को गुस्सा नहीं आता। इससे सोचने की क्षमता भी बढ़ती है।

10. व्रत रखना

 

हिंदू धर्म में आमतौर पर हर पूजा-पाठ में उपवास रखा जाता है। इससे पूजा का फल तो मिलता ही है साथ ही पाचन तंत्र भी ठीक रहता है। उपवास में सिर्फ फल खाए जाते हैं इससे शरीर डीटॉक्सीफाई होता है यानी हानिकारक टॉक्सिन शरीर से निकल जाते हैं।

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