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सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक पर लगाई रोक, खत्म हुई 1000 साल पुरानी प्रथा

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12:54 pm 22 Aug, 2017

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सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक पर ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए इसे अवैध करार दिया है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि केंद्र सरकार संसद में इसको लेकर कानून बनाए। कोर्ट ने कानून बनाने के लिए 6 महीने का वक्त दिया है। अगर छह महीने में कानून नहीं बनता है तो फिर भी यह रोक जारी रहेगी।

सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायधीश जे.एस. खेहर के नेतृत्व में 5 जजों की न्यायपीठ ने अपना फैसला सुनाया। तीन जज तीन तलाक को अंसवैधानिक घोषित करने के पक्ष में थे, वहीं दो जज इसके पक्ष में नहीं थे। इस तरह से 5 जजों वाली संवैधानिक पीठ ने 3-2 के बहुमत से ट्रिपल तलाक पर रोक लगा दी। इस पीठ में जस्टिस जेएस खेहर, जस्टिस कुरिएन जोसेफ, आरएफ नरीमन, यूयू ललित और एस अब्दुल नज़ीर शामिल थे।

इस मसले पर कोर्ट ने राजनीतिक दलों से अपने मतभेदों को दरकिनार रखने और तीन तलाक के संबंध में कानून बनाने में केन्द्र की मदद करने को कहा है।

इस केस की सुनवाई 11 मई को शुरु हुई थी। जजों ने इस केस में 18 मई को अपना फैसला सुरक्षित रख दिया था।

दरअसल, उत्तराखंड के काशीपुर की शायरा बानो ने पिछले साल सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर कर तीन तलाक और निकाह हलाला के चलन की संवैधानिकता को चुनौती दी थी। शायरा का तर्क था कि तीन तलाक न तो इस्लाम का हिस्सा है और न ही इसे आस्था से जोड़ा जा सकता है।


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शायरा ने मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत महिलाओं के साथ भेदभाव के मुद्दों, एकतरफा तलाक और पहली शादी के रहते हुए शौहर के दूसरी शादी करने के मुद्दे पर विचार करने को कहा था। अर्जी में कहा गया कि तीन तलाक संविधान के अनुच्छेद 14 व 15 के तहत मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

इसके बाद तो तीन तलाक के विरोध में कई याचिकाएं दयार की गईं। एक मामले में सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच ने भी खुद संज्ञान लेते हुए चीफ जस्टिस से आग्रह किया था कि वह स्पेशल बेंच का गठन करें, ताकि भेदभाव की शिकार मुस्लिम महिलाओं के मामलों को देखा जा सके।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर शायरा बानो ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने फैसले का स्वागत करते हुए जल्द कानून बनाए जाने की मांग की है।

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