‘रावण दहन’ पर रोक लगाने की कोशिश क्यों हो रही है?

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Updated on 11 Jul, 2017 at 7:17 pm

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सुप्रीम कोर्ट ने दशहरा के मौके पर रावण दहन पर रोक लगाने की मांग करने वाली जनहित याचिका खारिज कर दी है।

भारत के मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर ने रावण दहन की प्रथा बंद करने की याचिका खारिज करते हुए कहा:

“हर व्यक्ति को अपनी आस्था के अनुसार काम का अधिकार है। ऐसी कोई बात जो लोगों की आस्था का समर्थन करे, वो गलत नहीं हो सकती।”

आगे उन्होंने कहा:


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“जो धर्म जैसा है वह वैसा ही रहेगा। जिसे जो धर्म पसंद है वह उसे अपना सकता है। सुप्रीम कोर्ट क्या अच्छा है, क्या बुरा है, इस पर नहीं जाता, बल्कि कानूनी और गैरकानूनी पर विचार करता है। आपको अपनी मान्यताओं के अनुरूप जो कुछ अच्छा लगता है, वह सब करें और दूसरों को भी अपनी मान्यताओं के अनुरूप करने दें।”



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भारत के मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर currentaffairsonline

दरअसल, उत्तरप्रदेश के एक पत्रकार आनंद प्रकाश शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में रावण दहन की प्रथा पर रोक लगाने को लेकर जनहित याचिका दायर की थी।

उनका तर्क था कि दशहरे पर देशभर में रावण के पुतलों का दहन किया जाता है, जबकि किसी भी ग्रंथ या धार्मिक पुस्तकों में इसका जिक्र नहीं है। पुतले के दहन में पैसा बर्बाद होता है। साथ ही इससे वातावरण को भी नुकसान पहुंचता है।

चीफ जस्टिस जेएस खेहर की बेंच ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद-25 के तहत रावण दहन धार्मिक आजादी का हिस्सा है। संविधान में सभी नागरिकों को धार्मिक परंपरा का निर्वाह करने की आजादी दी गई है। इस पर रोक नहीं लगा सकते।


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