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इस विदेशी महिला ने बनाया था भारतीय सेना के सर्वोच्च सम्मान परमवीर चक्र का डिज़ाइन

1:46 pm 22 Jul, 2017

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आपको ये जानकर हैरानी होगी कि भारतीय सेना के जवानों को असाधारण वीरता के लिए दिए जाने वाले सर्वोच्च सम्मान परमवीर चक्र का डिज़ाइन किसी भारतीय ने नहीं, बल्कि एक विदेशी मूल की महिला सावित्री खालोनकर ने किया था। इतना ही नहीं 1950 से अब तक परमवीर चक्र के डिज़ाइन में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

सावित्री बाई का जन्म 20 जुलाई 1913 को स्विट्जरलैंड में हुआ था और उनका असली नाम ईवावोन लिंडा मेडे डे मारोस था। उन्होंने अपने माता-पिता के विरोध के बावजूद 1932 में भारतीय सेना के कैप्टन विक्रम खानोलकर से प्रेम विवाह कर लिया और बाद में हिंदू धर्म अपना लिया था। विक्रम खानोलकर मराठी थे। शादी के बाद ईवावोन लिंडा ने अपना नाम बदलकर सावित्री रख लिया। वैसे उन्होंने न सिर्फ़ नाम बदला, बल्कि पूरी तरह से हिंदू रिति-रिवाज को अपना लिया। उन्होंने खुद को पूरी तरह से भारतीय संस्कृति के अनुरूप ढाल लिया और हिंदी, मराठी और संस्कृत भाषा में भी महारत हासिल कर ली।


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सावित्री बाई कहती थी कि गलती से उन्होने यूरोप में जन्म ले लिया, उनकी आत्मा पूरी तरह से भारतीय है। हिंदू धर्म में उनकी बहुत रुचि थी और इसलिए उनके पास इससे जुड़ी बहुत जानकारियां थी। उनकी इसी जानकारी की वजह से इंडियन आर्मी की तरफ से मेजर जनरल हीरालाल अटल ने परमवीर चक्र का डिजाइन करने की ज़िम्मेदारी सौंपीं।

सावित्री बाई ने सर्वोच्च बहादुरी पुरस्कार के डिज़ाइन के लिए भी हिंदू धर्म का ही सहारा लिया। ये एक संयोग ही था कि सबसे पहला परमवीर चक्र सम्मान सावित्री बाई की पुत्री के देवर मेजर सोमनाथ शर्मा को मरणोपरांत प्रदान किया गया, जो वीरता पूर्वक लड़ते हुए 3 नवम्बर 1947 को शहीद हुए थे।

पति की मृत्यु के बाद सावित्री बाई अध्यात्म की ओर मुड़ गयीं। वह दार्जिलिंग के राम कृष्ण मिशन में चली गयीं। 26 नवम्बर 1990 को उनका देहान्त हो गया।

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