अब टैक्स फ्री नहीं रही सऊदी अरब की कमाई, बड़ी संख्या में लौटेंगे भारतीय

Updated on 22 Jun, 2017 at 5:20 pm

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अमेरिकी फैसले से पहले ही भारतीय अप्रवासी संकट में थे। अब सऊदी अरब के एक फैसले ने भारतीय लोग जो वहां रोजगार कर रहे हैं, गहरा झटका दिया है। डोनाल्ड ट्रंप ने संरक्षणवाद के जिस वैश्विकीकरण की शुरुआत की थी उसका विस्तार देखने को मिल रहा है। फलस्वरूप भारत जैसे विकासशील देशों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।

सऊदी अरब एक ऐसा देश है जहां कोई इनकम टैक्स नहीं लगता है। पूरा देश से सिर्फ पेट्रोलियम से होने वाली आमदनी से ही चलता है, लेकिन वहां जुलाई 2017 से एक नया टैक्स लगाने का प्रस्ताव किया गया है। यह टैक्स वहां काम करने वाले अप्रवासी भारतीयों से वसूला जाएगा।

टैक्स का प्रारूप कुछ इस तरह रखा गया है, जो प्रतिवर्ष बदलेगा।

1. वर्ष 2017 :–प्रत्येक कर्मचारी व परिवार के प्रति सदस्य पर 100 रियाल मासिक टैक्स देना होगा।
2. वर्ष 2018 :-कंपनी में स्थानीय कर्मचारियों की संख्या कम होने पर प्रत्येक प्रवासी कर्मचारी को 400 रियाल देना होगा। जिन कंपनियों में स्थानीय कर्मचारियों की बहुलता होगी वहां के प्रवासी कर्मचारी को 300 रियाल देना होगा। परिवार के प्रत्येक सदस्य पर 200 रियाल देय होगा।
3. वर्ष 2019 :- कंपनी में स्थानीय कर्मचारियों की संख्या कम होने पर प्रत्येक प्रवासी कर्मचारी को 600 रियाल देना होगा। जिन कंपनियों में स्थानीय कर्मचारियों की बहुलता होगी वहां के प्रवासी कर्मचारी को 500 रियाल देना होगा। परिवार के प्रत्येक सदस्य पर 300 रियाल देय होगा।
4. वर्ष 2020 :- कंपनी में स्थानीय कर्मचारियों की संख्या कम होने पर प्रत्येक प्रवासी कर्मचारी को 800 रियाल देना होगा। जिन कंपनियों में स्थानीय कर्मचारियों की बहुलता होगी वहां के प्रवासी कर्मचारी को 700 रियाल देना होगा। परिवार के प्रत्येक सदस्य पर 400 रियाल देय होगा।


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अगर किसी के परिवार में एक वाइफ और दो बच्चे हैं तो उसे 3600 रियाल एडवांस टैक्स के तौर पर चुकाना होगा।

सऊदी अरब की सरकार ने यह टैक्स अपनी माली हालत दुरुस्त करने के लिए लगाई है। पेट्रोल की कीमतें घटने के कारण सऊदी सरकार वित्तीय संकट में फंस गई है। सरकार के इस कदम से आर्थिक स्थिति ठीक हो सकती है लेकिन कामगारों को परेशानी होगी, जिससे लोग वापस भी लौट सकते हैं। इस टैक्स की वजह से लोगों पर अचानक खर्च का बोझ बढ़ गया है। ऐसे में वहां रहने वाले भारतीयों के पास अपने परिवार के सदस्यों को वापस भेजने के अलावा कोई रास्ता नहीं है।

यहां ध्यान देने वाली योग्य बात यह है कि करीब 86 फीसदी प्रवासी कर्मचारियों की मासिक आमदनी 2 हजार रियाल के करीब है। 100 रियाल भारत के 1700 रुपए के बराबर है।

नौकरी की तलाश में भारत से सबसे ज्यादा लोग सऊदी अरब ही जाते हैं। सऊदी में सभी कामगारों के लिए एक समान नियम है, फिर चाहे वो देश का हो या विदेशी। सबके लिए एक समान कानून हैं। वहां एक साथ 5 घंटे से ज्यादा काम नहीं कराया जा सकता है। भारत से सबसे ज्यादा लोग यहां नौकरी के लिए आते हैं. फिलहाल 41 लाख भारतीय सऊदी अरब में काम कर रहे हैं।


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