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सऊदी अरब में 500 बिलियन डॉलर की लागत से बन रहा है दुनिया का सबसे बड़ा शहर

11:50 am 26 Oct, 2017

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सऊदी अरब दुनिया का सबसे बड़ा तेल निर्यातक देश है और इसकी अर्थव्यवस्था पूरी तरह तेल की कमाई पर ही निर्भर है। हालांकि, हाल के दिनों में तेल की कीमतों में लगातार गिरावट की वजह से देश की अर्थव्यवस्था को तगड़ा नुकसान हुआ है। कमाई का आलम यह है कि सऊदी अरब में काम करने वाले कर्मचारियों को समय से वेतन नहीं मिल रहा है। इस तरह की समस्याओं से निपटने के लिए सऊदी अरब अब नए रास्ते तलाश रहा है। कमाई के नए जरिए तलाशे जा रहे हैं। बिजनेस इन्साइडर की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब की सरकार अपनी अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए दुनिया का सबसे बड़ा शहर बना रही है, जो न केवल जॉर्डन और इजिप्ट को जो़ड़ेगा, बल्कि पूरी तरह वैकल्पिक ऊर्जा से संचालित होगा। इस शहर को बनाने में 500 बिलियन डॉलर की लागत आएगी।

इस परियोजना को बनाने की घोषणा सऊदी अरब के शहजादा मोहम्मद बिन सलमान ने की है।

करीब 10, 230 स्क्वायर मील क्षेत्र में फैला यह शहर उद्योग और व्यवसाय के मॉडल पर आधारित होगा। कुल मिलाकर कहा जाए तो यह शहर अमेरिका के सबसे बड़े शहर न्यूयार्क से करीब 33 गुना अधिक बड़ा होगा।


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इस शहर को बनाने का मुख्य उद्येश्य सऊदी अरब की तेल पर निर्भरता कम करना है। दुनिया के सबसे बड़े शहर में ऊर्जा, बॉयो टेक्नोलॉजी, निर्माण, इन्टरटेनमेन्ट आदि उद्योगों जोर दिया जाएगा। हालांकि, अब तक इसका मास्टरप्लान जारी नहीं किया गया है।

सऊदी अरब की बहुमंजिली इमारत पर काम करते कर्मचारी।

देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के उद्येश्य से सऊदी अरब में आमूल-चूल परिवर्तन किए जा रहे हैं। इसी क्रम में सऊदी अरब कट्टरपंथी इस्लाम के इमेज से छुटकारा पाना चाहता है। शहजादा बिन सलमान, जिसे आधुनिक सऊदी का चेहरा माना जाता है, ने देश को उदार बनाने का संकल्प लिया है।

सऊदी अरब को दुनिया भर में फैले कट्टरपंथी इस्लाम की धारा वहाबी इस्लाम का प्रायोजक माना जाता है। पश्चिम के बुद्धिजीवियों का आरोप है कि दुनिया में फैले इस्लामिक आतंकवाद के मूल में सऊदी अरब है। इस पर पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है।

सऊदी अरब को भी लगता है कि अब अति हो रही है। अगर दुनिया से कदम से कदम मिलाकर चलना है तो रवैया बदलना होगा।

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