क्या है सट्टा मटका? जानिए भारत में कैसे हुई इसकी शुरुआत

Updated on 3 Dec, 2018 at 5:13 pm

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जो लोग मेहनत करने से कतराते है वही लोग जज़्यादा पैसा कमाने के लिए शॉर्टकट ढूंढते है, जिसमें से एक सट्टा मटका नाम का जुआ है, जो भारत में काफ़ी चर्चित है। गैरकानुनी होने के बावजूद भी इस जुए को लोग सरकार से छिपकर बड़े पैमाने पर भारत में खेलते हैं। सट्टा मटका एक तरह का रिस्क है। अगर जीत जाते है तो फ़ायदा काफ़ी ज़्यादा होता है, जिसकी वजह से लोग इसकी ओर आकर्षित होते हैं।

 

आइए आपको बताते है सट्टा मटका की शुरुआत कब से हुई। जानकारों की माने तो सट्टा मटका की शुरुआत भारत में आज़ादी से पहले हुई थी, लेकिन उस ज़माने में इस खेल को पारंपारिक तौर पर खेला जाता था, लेकिन ज़माना अभी बदल चुका है। सट्टा मटका ने टेक्नोलॉजी की शक्ल ले ली है, जिससे इसको खेलना बेहद आसान हो चला है।

 


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अब आप सोच रहे होंगे इस जुए का नाम सट्टा मटका क्यों है। एक ज़माने में सट्टे मटके को खेलने के लिए मटके के अंदर पर्चियां डाली जाती थी और नंबर निकाले जाते थे। उस समय कॉटन के दाम पर सट्टा खेला जाता था। न्यूयॉर्क कॉटन एक्सचेंज से टेलीप्रिंटर के ज़रिए बॉम्बे कॉटन एक्सचेंज भेजा जाता था। वहीं कॉटन के शुरु होने और बंद होने के दाम पर सट्टा खेला जाता था।

 

क्या है सट्टा मटका खेल? क्यूं उड़ा देता है लोगो की नीदें - what is satka matka game

 

 

अब ये पुराना तरीका नए सिरे से खेला जा रहा है। सट्टे मटके को कई वेबसाइट्स और ऐप के ज़रिए ऑनलाइन खेला जाता है। इसमें सबसे पहले आपको कई नंबर्स में से किसी एक नंबर को चुनना होता है और उस पर पैसा लगाना होता है। अगर आपका सही नंबर लग जाता है तो आप जीत कर सट्टा किंग बन जाते है और उसके बदले आपको काफ़ी बड़ी रकम में पैसा मिलता है। भारत में भले ही इसे खुले तौर पर न खेला जाता हो मगर कई बड़े पैमाने पर इसका बिज़नेस है।

 

 

वैसे तो भारत में कई सट्टा मटका गेम हैं, लेकिन सबसे फ़ेमस कल्याण और वर्ली सट्टा मटका है। वर्ली मटका की शुरुआत गुजरात के किसान कल्याणजी भगत ने 1962 में की थी। ये सट्टा सातों दिन चलता है, जिसका मतलब है सातों दिन इस गेम पर सट्टा लगाया जा सकता है।

 

लेकिन 1964 में रतन खत्री ने न्यू वर्ली नाम के सट्टा मटका की शुरुआत की। भले ही इस खेल में कुछ परिवर्तन किए गए हो। मगर ये गेम सिर्फ़ हफ़्ते के 5 दिन ही खेला जाता है। वही इस आधुनिक मटके बिज़नेस को ऑनलाइन खेला जाता है। इसका मुख्य केंद्र महाराष्ट्र के आसपास का इलाका है।

 

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जुआ खेलना बेहद रिस्की है लेकिन फिर भी भारत में लोग इसे बड़े ही चाव से खेलते हैं। अगर लक काम कर गया तो मालामाल वरना किस्मत ने धोखा दे दिया तो कोई सड़क पर भी आ सकता है। इस तरह के गेम को खेलने से कई धनवान लोगों का दिवाला भी निकल चुका है।

 

 

लेकिन सट्टा स्वास्थ के लिए भी बेहद हानिकारक है। जो लोग इस सट्टे को खेलते हैं उन्हें सदमा और मानसिक चिंता लगी रहती है। उन लोगों के बर्ताव में भी चिड़चिड़ापन आ जाता है। जो लोग इस सदमें को बर्दाश्त नहीं कर पाते वो लोग आत्महत्या तक कर लेते हैं। आप ज़्यादा धन प्राप्त करने के लिए सट्टे जैसे रास्ते अपनाते हैं तो आपका जीवन दुखों का सागर बन सकता है क्योंकि इन सट्टो में लोगों की जिंदगी का तबाह होना बड़ी ही आम बात है।

 

डिस्क्लेमर: इस खबर का मकसद सिर्फ़ आपको अपडेट रखना है। हम किसी तरह की गैर-कानूनी जुआ गतिविधियों का समर्थन नहीं करते।


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