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3000 करोड़ की लागत से बनी ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ पर बोले लोग इससे देश का क्या फायदा

Published on 31 October, 2018 at 3:26 pm By

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को गुजरात के केवड़िया, नर्मदा में सरदार वल्लभ भाई पटेल की मूर्ति स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का लोकार्पण किया। यह समारोह सरदार पटेल की 31 अक्टूबर को जयंती के मौके पर आयोजित हुआ। ये दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ती है। इसे बनाने में मेहनत, समय और पैसा भी बहुत खर्च हुआ है। जहां कुछ लोग पीएम मोदी के इस कदम की तारीफ कर रहे हैं, वहीं मूर्ति पर हुए खर्च और इसको बनाने के पीछे छिपे मकसद को लेकर भी सवाल खड़े होने शुरु हो गए है।


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‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ अपने अनावरण के पहले से ही चर्चा का विषय रही है और इसकी वजह है इसका सबसे ऊंची मूर्ति होना। आपको बता दें कि इस मूर्ति को डिज़ाइन किया है नोएडा के पद्म भूषण मूर्तिकार राम सुतार ने।

मूर्ति की ऊंचाई 522 फीट है। यह गुजरात में नर्मदा नदी पर सरदार सरोवर बांध से 3.5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह प्रतिमा इतनी बड़ी है कि इसे 7 किलोमीटर की दूर से भी देखा जा सकता है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कुछ समय पहले पटेल की प्रतिमा को मेड इन चाइना बताया था।

 

 

सरदार पटेल की इस मूर्ति को बनाने में करीब 2,989 करोड़ रुपये का खर्च आया। इस प्रतिमा पर हुए  खर्च का ब्योरा भी आपको दिए देते हैं।

सरदार पटेल की मुख्य प्रतिमा बनाने में 1347 करोड़ रुपये का खर्च आया, जबकि 235 करोड़ रुपये प्रदर्शनी हॉल और सभागार केंद्र की साज सज्जा पर खर्च किए गए। इसके अलावा 657 करोड़ रुपये निर्माण कार्य पूरा होने के बाद अगले 15 साल तक ढांचे के रखरखाव पर खर्च किए जाने हैं, जबकि 83 करोड़ रुपये पुल के निर्माण पर खर्च करने की योजना है। इसी तरह मूर्ती से जुड़े कई और खर्च भी है।

अब आप खुद ही अंदाजा लगा लीजिए कि अगर इस पैसे को समाज के लिए उपयोग में लाया जाता तो कितने अस्पताल स्कूल और बुनियादी सुविधानों को बनाया और दुरुस्त किया जा सकता था। जिस गगनचुंबी मूर्ति के लिए सरकार अपनी पीठ थपथपा रही है, उसके न बनने पर क्या भारत की साख पर बट्टा लग रहा था ? या फिर उसके बन जाने से दुनिया में हम कई विकसित देशों से आगे हो गए ? ऐसे कई सवाल है जिसको लेकर सोशल मीडिया पर लोग अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं।


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भारत के लौह पुरुष सरदार पटेल की इतनी बड़ी प्रतिमा बनाने पर कुछ लोग जहां सरकार की तारीफ कर रहे है, वहीं आलोचना करने वालों की भी कमी नहीं है। लोगों का कहना है कि इस मूर्ति पर जो पैसा खर्च हुआ उससे हजारों लोगों के लिए नौकरियां पैदा की जा सकती है और स्वास्थय सेवाओं में सुधार किया जा सकता था।

ट्वीटर पर लोगों ने इस मूर्ति पर अपनी प्रतिक्रियाएं दी-



 

वैसे हमारे देश के लोगों की आदत है जो जीवित होता है उसकी कद्र नहीं करते, लेकिन मर जाने पर लोगों की याद में बेकार में पैसे खर्च करने को वो महानता समझते हैं। उधर अपनी आलोचना करने वालों को मोदी ने करारा जवाब देते हुए कहा कि महापुरुषों को याद करना अपराध नहीं है। बिल्कुल सही कहा मोदी जी ने याद करने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन एक मूर्ति के लिए करोड़ों रुपए फूंकना क्या समझदारी है?


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