15 अगस्त से पहले हर देशभक्त भारतीय को एक बार यह विडियो जरूर देखना चाहिए

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Updated on 14 Aug, 2018 at 1:23 pm

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आज अगर हम भारत के ताजा परिप्रेक्ष्य पर गौर करें, तो देश का अधिकतर भाग सांप्रदायिक एवं विघटनकारी राष्ट्रद्रोहियों की चपेट में फंसा दिखाई देता है। कश्मीर जल रहा है और उसकी आंच पूरे देश की गरिमा पर पड़ती दिखाई दे रही है। पाकिस्तान ऐसे मौकों को भुनाने के लिए अलगावादियों को समर्थन कर रहा है। वहीं राष्ट्रद्रोहियों ने आम जनता को बरगालाने में कोई कसर नही छोड़ी है। संकट की ऐसी घड़ी में सरदार पटेल की स्मृति मन में जागना स्वभाविक है।

 

सरदार पटेल की ख्याति किसी शूरवीर से कम नहीं थी। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत के सामने ज्वलंत प्रश्न था कि छोटी-बड़ी 562 रियायतों को भारतीय संघ में कैसे समाहित किया जाए। इस जटिल कार्य को जिस महापुरुष ने बिना हथियार की मदद से निहायत सादगी तथा शालीनता से सुलझाया, वह ज़रूरत पड़ने पर बंदूक उठाने की भी बात करते थे। यह कोई और नहीं, भारत के लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल ही थे।

 

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सरदार पटेल पाकिस्तान के  नापाक इरादों और छद्म युद्ध की कूटनीति से भलीभांति वाकिफ़ थे। इसलिए वह समय-समय पर पाकिस्तान को सुधर जाने की नसीहत भी देते रहते थे।



3 जनवरी 1948 को कलकत्ता के मैदान में दिए अपने ऐतिहासिक भाषण में उन्होंने कहा था कि अगर हमारा एक भी सिपाही मरा तो कश्मीर की बात पाकिस्तान के साथ बंदूक की दम पर ही होगी।

 

देखें ये दुर्लभ विडियो:

 


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