जानिए बसंत पंचमी के दिन ही क्यों होती है मां सरस्वती की पूजा

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Updated on 1 Feb, 2017 at 9:12 am

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विद्या और कला की देवी मां सरस्वती की पूजा आज पूरे देश भर में हो रही है। यह उत्सव बसंत पंचमी के दिन मनाया जाता है। यह मान्यता है कि माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी के दिन मां सरस्वती का जन्म हुआ था।

भारत के पौराणिक कथाओं और शास्त्रों में सरस्वती पूजा और बसंत पंचमी को लेकर एक रोचक कथा का जिक्र है।

हिन्दु पुराणों के मुताबिक, सृष्टि की जब रचना की जा रही थी, उस वक्त भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने मनुष्य की रचना की। लेकिन इस सृजन से वह संतुष्ट नहीं थे। चारों तरफ उदासी का माहौल था और वातावरण मानो मूक सा हो गया थआ। यह देखकर ब्रह्माजी अपने कमण्डल से जल छिड़का। उन जलकणों के पेड़ों की पत्तियों पर पड़ते ही एक शक्ति की उत्पति हुई, जो अपने हाथों से वीणा बजा रहीं थीं। उन्होंने अपने हाथों में पुस्तक माला धारण की हुई थी। इस शक्ति ने जीवों को वाणी प्रदान किया और यही वजह है कि उन्हें सरस्वती कहा गया।

बेहद शुभ है बसंत पंचमी


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देवी सरस्वती को बुद्धि और विद्या की देवी माना जाता है। इसलिए उनके जन्मदिन पर उनकी पूजा की जाती है। इस दिन कोई नया काम करना शुभ माना जाता है। भारतीय समाज बच्चों की पढ़ाई-लिखाई विधिवत इसी दिन शुरू होती है। जिन बच्चों का मन पढ़ाई में नहीं लगता या निराश हैं, उन्हें देवी सरस्वती की पूजा जरूर करनी चाहिए।

कैसे करना चाहिए सरस्वती पूजन

बसंत पंचमी के दिन लोगों को विधिवत अपने घर में सरस्वती यंत्र की स्थापना करना चाहिए। साधक को मां सरस्वती के इस विशेष मंत्र का 108 बार जप करना चाहिए।

कब है शुभ मुहूर्त

वसंत पंचमी 31 जनवरी को रात 3 बजकर 26 मिनट से शुरू हो जाएगी जो 1 फरवरी यानी आज रात 1 बजकर 51 मिनट तक रहेगी। इसलिए 1 फरवरी को केवल 12 बजे से लेकर 1 बजकर 30 मिनट तक का समय जो राहुकाल है, उस समय को छोड़कर पूरा दिन शुभ कार्यों के लिए विशेष लाभकारी रहेगा।

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