बिहार में सरस्वती पूजा करने के लिए लेना पड़ रहा है लाइसेन्स, जानकर हैरत में पड़ जाएंगे आप

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Updated on 31 Jan, 2017 at 10:49 am

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गली-मोहल्ले और स्कूलों में बच्चों द्वारा सरस्वती पूजन का चलन लंबे समय से रहा है। स्कूली बच्चे समूह बनाकर अपने मोहल्लों में, स्कूलों में देवी सरस्वती की पूजा करते रहे हैं। इसके लिए किसी भी तरह की कानूनी अनुमति लेने की जरूरत नहीं पड़ती थी, लेकिन अब बिहार में सरस्वती पूजा के लिए लाइसेन्स लेना पड़ रहा है।

बिहार के अलग-अलग स्थानों से आ रही रिपोर्ट्स में कहा गया है कि कल यानी 1 फरवरी को होने वाली सरस्वती पूजा को लेकर जिला प्रशासन और पुलिस गंभीर है। मोहल्ला और टोला स्तर पर गठित पूजा कमेटियों के लिए लाइसेन्स अनिवार्य कर दिया गया है। यहां तक कि अपने आवास पर सरस्वती पूजा करने वाले छात्रों के अभिभावकों को भी लाइसेन्स लेना होगा। साथ ही निजी स्कूलों को भी दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

दैनिक जागरण की इस रिपोर्ट के मुताबिक, मोतिहारी जिला मुख्यालय सहित अनुमंडल क्षेत्र में सरस्वती पूजा को शांतिपूर्ण संपन्न कराने को लेकर सदर उसडीओ रजनीश लाल ने अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने कहा कि बिना लाइसेंस पूजा करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।



इसी तरह की एक बैठक जमुई में की गई। यहां भी प्रशासनिक अधिकारियों ने पूजा के थाना से लाइसेन्स लेने को अनिवार्य बताया है। गया से भी इसी तरह की खबर है। वहीं, पुर्णिया में पूजा आयोजन के लाइसेन्स जरूरी कर दिया गया है, साथ ही डीजे पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

गौरतलब है कि सरस्वती पूजा एक व्यक्तिगत मामला रहा है। हिन्दू समुदाय के छात्र प्रायः प्रत्येक घर में सरस्वती मूर्ति की स्थापना कर पूजा करते रहे हैं। लेकिन बिहार में प्रशासन के तुगलकी फरमान से अब सरस्वती पूजा पर प्रतिबंध सा लगना तय लग रहा है।


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