परिवार जिस माथे पर सेहरा बांधने की तैयारियां कर रहा था, वही तिरंगे में लिपटकर अपने घर पहुंचा

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9:26 pm 20 Sep, 2016

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कर चले हम फिदा जानों तन साथियों

अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों…

एक बार फिर, आखिर कब तक! कब तक पाकिस्तान अपने नापाक इरादों से भारत की सरजमीं को नुकसान पहुंचाता रहेगा? कब तक सीमा पर हमारे जवान शहीद होते रहेंगे? परिवार से दूर रह रहे ये जवान, किसी के बेटे, किसी के पिता, किसी के पति तो किसी के भाई हैं, लेकिन ये जवान अपना सर्वोपरि रिश्ता अपनी मातृभूमि से रखते हैं।

18 सितंबर को कश्मीर के उरी में हुए आतंकी हमले में हमने अपने 18 जवान खो दिए। एक-एक जवान की जान की कीमत का मोल हम और आप नहीं लगा सकते, जो चौबीसों पहर डटकर देश की हिफाजत करते हैं।

इन्हीं 18 शहीद जवानों में से थे लांस नायक संदीप सोमनाथ ठोक। जिस उम्र के दौर में आमतौर पर युवा अपने करियर के बारे में सोचते हैं, उसी उम्र में देश के एक वीर सपूत ने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी।

महाराष्ट्र के नासिक के रहने वाले 25 वर्षीया संदीप के घर पर उनकी शादी की तैयारियां चल रही थी। एक महीने के बाद उनके सिर पर सेहरा बंधने वाला था, लेकिन घर पर उनकी शहादत की खबर मिलते ही पल भर में ये खुशियां मातम में बदल गईं।

sandeep

bhaskar


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एक पिता के लिए अपने जवान बेटे की अर्थी को कंधों पर उठाने का दर्द बयां करते हुए संदीप के पिता कहते है कि “मैं भी कैसा अभागा पिता हूं कि अपने बेटे की शादी से पहले ही उसका जनाजा उठा रहा हूं।”



फार्मेसी में स्नातक संदीप के सामने एक उज्जवल करियर की राह थी, लेकिन एक किसान परिवार से आने वाले संदीप ने भारतीय सेना को चुना। वह 2014 में भारतीय सेना में शामिल हुए। सेना में शामिल हुए संदीप बिहार रेजीमेंट में बतौर लांस नायक जुड़े थे। उनकी पहली पोस्टिंग रणनीतिक रूप से महत्‍वपूर्ण लेकिन बेहद मुश्किल उरी सेक्‍टर में थी।

जब संदीप का पार्थिव शरीर उनके घर पहुंचा, तो पूरे गांव ने और साथी जवानों ने भारत माता की जय और पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारों के बीच शहीद को अंतिम विदाई देते हुए सलामी दी।

उरी में हुआ आतंकी हमला सेना पर अब तक का सबसे बड़ा हमला है। शहीदों के परिजन सरकार से आंतकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।


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