भक्त पर आई मुसीबत तो इस संत ने लौटा दी उसकी दान की हुई 10 करोड़ की जमीन

Updated on 18 Sep, 2018 at 11:26 am

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इस देश में आत्म ज्ञान प्राप्त संतों की अनेकों कहानियां है। 1 अरब से भी ज्यादा आबादी वाले भारत में हजारों की तादाद में बाबा और साधू संत है। यहां ऐसे संतो की एक लंबी चौड़ी फेहरिस्त है, जिनके समर्थकों के लिए वो नायक और आलोचकों के लिए खलनायक है। खुद को अवतार और भगवान बताने वाले ऐसे कई संत है जो किसी न किसी वजह से आए दिन सुर्खियों में बने रहते हैं।

 

 

बीते कुछ समय में भारत में संतों से जुड़े ऐसे कई मामले सामने आए, जिसने पूरे संत वर्ग की छवि पर एक सवालिया निशान खड़ा कर दिया। इसमें आसाराम बापू और गुरमीत राम रहीम जैसे संतों से जुड़े कई मामले शामिल हैं। लेकिन हाल ही में संत और श्रद्धालु के रिश्ते की पवित्रता को उजागर करता एक ऐसा वाकया सामने आया है, जिसने पूरे संत समाज के लिए एक मिसाल कायम कर दी।

 

दरअसल, साल 2004 में राजकोट के रसिकलाल एंड कंपनी के मुखिया ने सारण स्थित अपनी जमीन इंद्रभारती बापू को दान में दी थी। आश्रम पर बापू ने बाग बगीचा विकसित कर अपना एक आश्रम बनवाया। धारे-धीरे पूरा आश्रम साधू-संतो का बसेरा बन गया।

 


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इस बीच रसिकलाल एंड कंपनी को बिजनेस में काफी नुकसान हुआ। रसिकलाल पर ऐसा बुरा समय आया कि बिजनेस में हुए नुकसान
को पूरा करने के लिए उनके परिवार को अपनी निजी संपत्ति तक बेचनी पड़ी। जैसे ही भक्त पर आए इस संकट की भनक बापू को लगी, उन्होंने  श्रावण महीने के अंतिम दिनों में ही दान की गई जमीन पर लोकसंगीत कार्यक्रम का आयोजन करवाया।

 

 

संत ने माइक पर सभी के सामने कहा ”2007 में इस भूमि पर मैंने अनुष्ठान किया था। रसिकलाल एंड कंपनी के मुखिया परिवार ने ये जमीन मुझे दान में सौंपी थी। इनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। इसलिए इस जमीन को मैं इस दाता परिवार को ही एक शिष्यभाई के रूप में वापस लौटाता हूं।”

यकीनन इस तरह का मामला भक्तों और उनके गुरु के बीच के सामंजस्य के रिश्ते को बखूबी दिखाता है। अपने शिष्य की मुसीबत की घड़ी में इस गुरु ने उसक साथ दिया और उसकी  दान की गई की जमीन उसे वापस लौटा दी। आज इस जमीन की कीमत 10 करोड़ है।

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