अपनी अदाकारी से दिलों में खौफ पैदा करता था यह विलेन, मौत ने चौंकाया था

Updated on 28 Oct, 2017 at 3:23 pm

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भले ही आज बॉलीवुड में भी खलचरित्रों की परिभाषा बदल गई हो, लेकिन एक दौर था जब खलनायकों की वजह से फ़िल्में चलती थी। विलेन के बिना हिन्दी फिल्म की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। हिन्दी फिल्म में हीरो का किरदार कोई भी कर सकता है लेकिन विलेन बनने के लिए उम्दा अभिनेता होने के साथ-साथ दमदार आवाज, बोल्ड चेहरा होना भी जरूरी माना जाता है। विलेन के किरदार में प्राण, प्रेम चोपड़ा, अमरीशपुरी, अमजत खान, परेश रावल, शक्ति कपूर आदि कई अभिनेताओं ने अपनी अमिट छाप छोड़ी है।

ऐसे ही एक अभिनेता रहे हैं सदाशिव अमरापुरकर।

सदाशिव ने अपने समय के बॉलीवुड के सभी दिग्गज और बड़े कलाकरों के साथ स्क्रीन शेयर कर चुके हैं। फिल्म ‘सड़क’ में इनके द्वारा निभाया किन्नर का वह रोल भला कौन भूल सकता है?

11 मई 1950 को महाराष्ट्र के अहमदनगर में जन्मे इस प्रतिभावान अभिनेता की मृत्यु 2014 में महज फेफड़ो में तकलीफ होने की वजह हो गई।

स्क्रीन पर आते ही दर्शकों के दिल में धुकधुकी पैदा कर देने वाले इस खौफनाक विलेन को धर्मेन्द्र अपना लकी मानते थी और उन्होंने उनके साथ एक-दो नहीं 11 फिल्मों में काम किया है। सदाशिव जिस फिल्म में रहते थे, हीरो से जयादा चर्चा बटोर लेते थे। इनको पहला ब्रेक फिल्ममेकर गोविंद निहलानी ने फिल्म ‘अर्द्धसत्य’ में दिया था, जिसके लिए इन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला था।


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इसके बाद विधु विनोद चोपड़ा की फिल्म ‘खामोश’ में उनके अभिनय की प्रशंसा हुई। उन्होंने अमिताभ बच्चन की फिल्म ‘आखिरी रास्ता’ में एक दमदार निगेटिव रोल किया, जिसे बहुत ही पसंद किया गया।

जान लें कि सदाशिव ने अपने करियर में हिन्दी सहित मराठी, बंगाली, उड़िया और हरियाणवी भाषा की कुल 300 फिल्में की हैं। ये अपनी डायलॉग डिलीवरी के लिए आज भी याद किए जाते हैं।

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