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जानिए कौन हैं देश के ये इकलौते IAS ऑफिसर, जिनके सम्मान में उनकी मूर्ति बनाई गई

Published on 6 December, 2018 at 12:54 pm By

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पूरे भारत में अलग-अलग राज्यों में विशाल मूर्तियां बनाने की भव्य योजनाएं चल रही हैं। ये आकाश छूती मूर्तियां पूर्व राजनेताओं, स्वतंत्रता सेनानियों या देवी-देवताओं की होती हैं। लेकिन हैदराबाद में एक ऐसी मूर्ति बनी है, जिसे न तो लोगों की भीड़ देखने आएगी और न ही उसे मीडिया कवरेज मिलेगा, क्योंकि ये मूर्तियों की फ़ेहरिस्त में आने वाली इतनी ऊंची मूर्ति नहीं है और न ही इसकी लागत इतनी ज़्यादा है।

ये मूर्ति त्रिपुरा के सिविल सर्वेंट एस आर शंकरन की है, जिनकी सेवा और काम के प्रति निष्ठा ने उन्हें ‘पीपुल्स आईएएस ऑफिसर’ का खिताब दिलाया। पीपुल्स आईएएस ऑफिसर’ यानी जनता का अधिकारी। शंकरन 1956 बैच के आईएएस अधिकारी थे। उन्होंने लोगों की मदद के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।

 


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SR Shankaran-एसआर शंकरन

 

एस आर शंकरन न केवल इंडियन सिविल सर्वेंट थे, बल्कि एक सामाजिक कार्यकर्ता और त्रिपुरा के मुख्य सचिव भी थे। वो 1976 के बंधुआ श्रम अधिनियम के उन्मूलन के प्रवर्तन में किए गए उनके योगदान के लिए जाने जाते हैं, जिसने भारत में बंधुआ मजदूरी को समाप्त किया।

 

एसआर शंकरन की प्रतिमा-SR Shankaran Statue

 

अपने पूरे करियर में एस आर शंकरन ने गरीबों और कमज़ोर लोगों के उत्थान की दिशा में अथक प्रयास किए, जो केवल सिविल सर्वेन्ट्स के लिए ही नहीं, बल्कि नागरिकों के लिए भी एक उदाहरण रहा।

 

शंकरन 1987 में माओवादियों द्वारा अपहरण किए गए सात सिविल सेवकों में से एक थे।



 

IAS Officer R Shankaran- आईएएस ऑफिसर आर शंकरन

 

आंध्र प्रदेश में नक्सली हिंसा को समाप्त करने के लिए 2004 की वार्ता में वो राज्य सरकार के मुख्य वार्ताकार भी थे।

 

Naxalite violence -नक्सली गतिविधियां

 

वो सफ़ाई कर्मचारी आंदोलन के प्रमुख थे, जो बेजवाड़ा विल्सन ने भारत में मैनुअल स्कैवेंगिंग को खत्म करने के लिए शुरू किया था। भारत सरकार ने उन्हें समाज में उनके योगदान के लिए 2005 में तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान, पद्म भूषण से सम्मानित भी किया था, लेकिन उन्होंने सम्मान को अस्वीकार कर दिया।

 

Safai Karmachari Andolan- सफाई कर्मचारी आंदोलन

 


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उनकी सामाजिक कल्याणकारी गतिविधियों ने उन्हें लोगों के बीच प्रसिद्ध बना दिया। इनके यही अथक प्रयास और कर्तव्यनिष्ठा इन्हें अब मूर्ति रूप में सम्मानित करवा रही है। हमारे देश में और कई ऐसे महा पुरुष है, जिन्होंने आम जनता के साथ रहकर उनके दर्द को समझा और फिर उनके कल्याण के लिए अपना पूरा जीवन न्योछावर कर दिया। ऐसे महापुरुषों को हमारा नमन।

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