सीरिया के युद्ध मैदान में सीधे भिड़ेंगे रूस और अमेरिका !

Updated on 21 Jun, 2017 at 10:51 am

Advertisement

रूस ने कहा है कि वह अब सीरिया में अमेरिकी गठबंधन सेना के लड़ाकू विमानों को अपना टारगेट मानेगा। रविवार को अमेरिका ने सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद की फौज के एक लड़ाकू विमान पर हमला कर उसे नीचे गिरा दिया था। इस ताजा हालात के मद्देनजर दोनों देशों में आमने-सामने की टकराहट का अंदेशा साफ झलक रहा है।

अमेरिका जहां SDF के साथ मिलकर सीरिया में ISIS के खिलाफ लड़ रहा है, वहीं रूस यहां चल रहे गृह युद्ध में असद सरकार की सैन्य मदद कर रहा है। पहले से ही संभावना जताई जा रही थी कि इस नए घटनाक्रम के बाद अमेरिका और रूस के बीच तनाव और बढ़ सकता है।

रूस ने अपना रुख साफ किया है कि वह अब अपने मिसाइल्स और एयरक्राफ्ट्स की मदद से अमेरिकी गठबंधन के विमानों पर नजर रखेगा। रूस ने हालांकि यह बात कही नहीं है, लेकिन उसके संकेतों से ऐसा लगता है कि वह भी अमेरिकी विमानों को नीचे गिराने के लिए तैयार है।

रूस ने अमेरिका के साथ अपना हॉटलाइन संपर्क भी काट दिया है। इस हॉटलाइन का इस्तेमाल करके ही रूस और अमेरिका सीरिया में सीधी भिड़ंत से बचने के लिए अपनी-अपनी सैन्य कार्रवाई के बारे में एक-दूसरे को सूचित करते रहे हैं।


Advertisement



इससे पहले अप्रैल में जब ट्रंप प्रशासन ने सीरिया के एक एयरबेस पर मिसाइल हमला किया था, उस समय भी रूस ने इस हॉटलाइन को बंद कर दिया था। रूस के रक्षा मंत्री ने एक बयान जारी कर कहा, ‘यूफ्रेटीज नदी के पश्चिमी किनारे की ओर दिखने वाले अमेरिकी गठबंधन सेना के विमानों को रूस अपना हवाई टारगेट मानेगा।’

ऐसा पहली बार हुआ है कि जब अमेरिका ने सीरिया के विमान को निशाना बनाया। अमेरिकी वायु सेना का कहना था कि उसने जिस सीरियन जेट को गिराया, उसने सीरियन डेमोक्रैटिक फोर्सेस (SDF)पर हमला किया था।

इन आरोपों का खंडन करते हुए असद सरकार ने कहा कि जिस समय अमेरिका ने उसके विमान को टारगेट किया, उस वक्त वह विमान ISIS आतंकियों के खिलाफ एक कार्रवाई को अंजाम दे रहा था। रूस के उप विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका द्वारा की गई हरकत से उन आतंकवादियों को मदद मिल रही है, जिनके खिलाफ लड़ने का दावा वॉशिंगटन करता है।


Advertisement

आपके विचार


  • Advertisement