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प्रकृति की अद्भुत रचनाओं में एक है रॉयल बंगाल टाइगर, ये हैं इससे जुड़े 20 रोचक तथ्य

Updated on 1 September, 2018 at 2:01 pm By

रॉयल बंगाल टाइगर, या पेंथेरा टिगरिस, प्रकृति की सबसे अद्भुत रचनाओं में से एक है। यह बाघ परिवार की एक उप-प्रजाति है और भारत, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, म्यांमार एवं दक्षिण तिब्बत के क्षेत्रों में पाई जाती है। इसके शौर्य, सुंदरता और बलशाली रूप को देखते हुए बंगाल टाइगर को राष्ट्रीय पशु के सम्मान से नवाज़ा गया है। हमने इसके बारे में ऐसे ही कुछ 20 रोचक तथ्यों का संकलन किया है।

1. 420 पाउंड तक वज़नी हो सकता है नर बंगाल टाइगर


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रॉयल बंगाल टाइगर का विशाल आकार आपको ख़ौफ़ में डाल सकता है। पूरी तरह विकसित एक बंगाल टाइगर 9 फुट तक की लंबाई का हो सकता है। मादा बंगाल टाइगर नर के मुकाबले छोटी होती है। उसका आकार अक्सर 8 फुट तक ही बढ़ता है और वज़न करीबन 320 पाउंड तक हो सकता है।

2. असीमित शक्ति

इस बाघ का विशाल शरीर उसे इस काबिल बना देता है कि अपने से भारी शिकार को भी एक कोस से दूर ले जा सकें।

3. दुर्लभ प्रजाति है सफेद बंगाल बाघ

सफेद बंगाल टाइगर जीन म्युटेशन के कारण सफ़ेद होते हैं, न कि अल्बाइनो होने की वजह से।

4. बंगाल टाइगर के कैनाइन दांत होते हैं सबसे लम्बे

मांस खाने वाले स्तनधारी जीवों में बाघ के कैनाइन दांत सबसे लम्बे होते हैं। यह दांत 4 इंच तक बढ़ सकते हैं जो बब्बर शेर के कैनाइन दांतों से भी बड़े हैं। इन शक्तिशाली जीवों के पास अंदर से बाहर जाने वाले पंजे भी होतें हैं, जो उन्हें चढ़ाई करने में सहायता करते हैं। अन्य जीवों की अपेक्षा बाघों की देखने और सुनने की शक्ति कहीं ज्यादा होती है।

5. एकांत पसंद होते हैं बंगाल टाइगर

बंगाल टाइगर लौलैंड्स (नीची ज़मीन) पर रहना पसंद करते हैं। अक्सर उन्हें घास के मैदान, दलदल और मैंग्रोव्स में देखा जाता है। प्रजनन के दौरान ये साथ-साथ देखे जाते हैं। कभी कभी ये 3-4 बाघों के झुण्ड में भी रहते हुए देखे जा सकते हैं।

6. बंगाल टाइगर और उनकी पहुंच

रॉयल बंगाल टाइगर बड़ी दूरी को आसानी से पार कर सकते हैं। ऐसे तो ये आलसी और सुस्त जान पड़ते हैं, लेकिन गति में आने पर ये बड़ी से बड़ी दूरी तय कर लेते हैं। यह दूरी 200 वर्ग मील तक की हो सकती है।

7. वृक्षों और बाघ का अटूट रिश्ता


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बाघों का भारी शरीर पेड़ पर चढ़ने के अनुकूल नहीं होता, लेकिन यदि आंखों के सामने शिकार हो, तो वे पेड़ पर भी चढ़ सकते हैं। भले ही ऐसा करते वक़्त वे कितने ही अनाड़ी क्यों न लगें।

8. अद्भुत तैराक

बंगाल का मैंग्रोव इको-सिस्टम इन बाघों के लिए लाभदाय़क सिद्ध होता है। तैराकी में पारंगत इन बाघों से विरल ही कोई शिकार चूकता है। पानी के अंदर रह कर भी इनके पंजों की पकड़ और तेज़ी में कोई कमी नहीं आती।

9. पसंद करते हैं जंगली सूअर, हिरण, मृग और भैंस का शिकार

रॉयल बंगाल टाइगर जरूरत पड़ने पर बंदर, मोर, मगरमच्छ, भेड़िये, तेंदुए यहां तक कि युवा हाथी तक का शिकार कर सकते हैं। ध्यान रहे, एक भूखे बाघ के लिए कोई भी चलता हुआ प्राणी भोजन सामान है।

10. ये शिकार को निपटाने में समय नहीं लेते



एक ही झटके में शिकार को अपने चंगुल में लेना बाघों के लिए कोई कठिन कार्य नहीं है। ये अपने शिकार पर एक सशक्त प्रहार से उसके गले और रीढ़ की हड्डी को तोड़ देते हैं। इनकी मजबूत पकड़ के चलते शिकार अपने प्राण त्याग देता है।

11. मांस प्रेमी बंगाल टाइगर

एक बड़ा बाघ एक बार में 30 से 40 किलो तक मांस का सेवन कर सकता है और तीन-चार हफ्ते बिना शिकार किए संतुष्टि से रह सकता है।

12. तीन से चार शावकों को जन्म देती है मादा

मादा बंगाल टाइगर तीन साल की उम्र में परिपक्व हो जाती है। इनके गर्भ की अवधि तीन महीने की होती है। बंगाल टाइगर कैद में लगभग 25 साल तक जीवित रह सकते हैं, लेकिन खुले जंगल में इनकी आयु थोड़ी कम होती है।

13. नेत्रहीन और 2 पाउंड से भी हल्का होता है नवजात शिशु बाघ

यह मानना मुश्किल है कि जन्म के समय यह बड़ी बिल्ली जैसा जीव निहायत ही असहाय और छोटा होता है। नर बाघ शिशु जन्म से लेकर दो वर्षों तक ही अपनी मां के साथ रहतें हैं। मादा बाघ शिशु बड़े होने के बाद भी अपनी मां के साथ होते हैं।

14. लुप्त होने की कगार पर

घटते जंगल और मनुष्यों द्वारा किया जाने वाले शिकार की वजह से बाघों की यह प्रजाति लुप्त हुई जा रही है। ऐसा माना जाता है कि इनकी जनसंख्या घट कर कुल 1300 रह गई है।

15. पूर्वी एशियाई बाजार दे रहे बाघों के अंगों के अवैध व्यापार को बढ़ावा

आंखों से ले कर पंजों तक इन बाघों के हर हिस्से का व्यापार होता है। यह व्यापार लोगों के लिए भारी कमाई करने का जरिया बन चुका है।

16. शक्तिशाली दहाड़

इन बाघों की दहाड़ को दो मील दूर से सुना जा सकता है।

17. एक जनगणना के अनुसार 440 बाघ बांग्लादेश में, 253 बाघ नेपाल में और करीबन 80 बाघ भूटान में थे।

हालांकि, इस अनुमान पर कई सवाल उठाएं गए हैं।

18. ब्लैक टाइगर

वर्ष 1846 में चटगांव इलाके में अब तक का एकलौता पूरा ब्लैक टाइगर पाया गया था।

19. सबसे प्राचीन बाघ

अब तक का सबसे प्राचीन बाघ का अवशेष श्रीलंका में पाया गया था जो करीब 16,500 साल पुराना था।

20. मजबूरी में बनते हैं आदमखोर


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बाघों को इंसानों की हत्या के लिए जाना जाता है, लेकिन वे इंसानो को अपना शिकार तभी बनाते हैं, जब वे अत्यंत बूढ़े और कमज़ोर हो चुके हों या उन्हें अन्य कहीं शिकार नहीं मिले।

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