अवैध रूप से भारत आने वाले रोहिंग्या मुसलमानों को रोकना आसान नहीं है!

Updated on 20 Oct, 2017 at 4:20 pm

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भारत-बांग्लादेश सीमा पर रोहिंग्या घुसपैठिए भारत के लिए सिरदर्द बने हुए हैं।

देश की सुरक्षा के लिए रोहिंग्या एक बड़ी समस्या बन रहे हैं। सीमा पर लगभग 150 संवेदनशील जगहों को चिन्हित किया गया है, जहां से ये देश में दाखिल हो रहे हैं।  खासकर भौगोलिक कारणों की वजह से इन्हें रोकना एक चुनौती बन रहा है। पिछले कुछ सालों से दलालों के माध्यम से रोहिंग्या अवैध तरीके से भारत में घुसपैठ करते रहे हैं।

भारत-बांग्लादेश की सीमा के एक बड़े हिस्से पर तारबंदी नहीं हुई है। इसका फायदा दलाल उठाते हैं और इसके जरिए ही रोहिंग्या मुसलमानों की घुसपैठ कराते हैं। इन्हें घुसपैठ कराने वाले स्थानीय लोग होते हैं।


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बांग्लादेश के साथ भारत की 4096 किलोमीटर लंबी सीमा है। इसके आधे हिस्से में ही बाड़ लगी है। करीब 2117 किलोमीटर लंबी सीमा पश्चिम बंगाल में है और वहां से घुसपैठियों का आना आम है।

भारत में हैं 2 करोड़ अवैध बांग्लादेशी

आंकड़ों की बात करें तो पिछले साल सरकार ने राज्यसभा को बताया था कि लगभग 2 करोड़ बांग्लादेशी भारत में अवैध रूप से रह रहे हैं। वहीं रोहिंग्या समुदाय के लोगों की संख्या लगभग 40 हजार है, जिनमें से अधिकतर नई दिल्ली, जम्मू, हैदराबाद और जयपुर में अस्थायी शिविरों में हैं। रोहिंग्या की संख्या भले ही कम हो, लेकिन उनकी मौजूदगी से एक कानूनी, कूटनीतिक और राजनीतिक रस्साकशी शुरू हो गई है।

 


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