रोहिंग्या मुसलमानों पर मोदी सरकार की सख्ती, देश से बाहर करने की तैयारी

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Updated on 4 Apr, 2017 at 11:43 am

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भारत में रह रहे 40 हजार से अधिक रोहिंग्या मुसलमानों को भारत छोड़ना पड़ सकता है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले कुछ सालों से भारत में रह रहे रोहिंग्या मुस्लिम समुदाय के लोगों को गिरफ्तार कर वापस म्यांमार भेजा जा सकता है। बड़ी संख्या में रोहिंग्या मुसलमान बांग्लादेश, म्यांमार और समुद्र की सीमा से भारत में अवैध तरीके से घुसे हैं। अब गृह विभाग इन्हें फॉरनर्स एक्ट के तहत वापस म्यांमार भेजने की कवायद में है। अधिकतर रोहिंग्या मुसलमान जम्मू-कश्मीर व पश्चिम बंगाल में शरण लिए हुए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि इस मुद्दे पर केंद्रीय गृह सचिव राजीव महर्षि की अध्यक्षता में एक बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में इनकी पहचान, गिरफ्तारी और देश से बाहर भेजने की रणनीति पर बातचीत की गई है। जम्मू-कश्मीर के डीजीपी, चीफ सेकेट्ररी भी इस बैठक का हिस्सा रहे थे।

क्या है रोहिंग्या मुसलमानों का विवाद

इस विवाद की जड़ करीब 100 साल पुरानी है। हालांकि, हाल में विवाद की शुरुआत वर्ष 1982 में हुई, जब म्यांमार सरकार ने नए बने राष्ट्रीयता कानून में रोहिंग्या मुसलमानों का नागरिक दर्जा खत्म कर दिया। ताजा विवाद तब शुरु हुआ जब वर्ष 2012 में म्यांमार के राखिन राज्य में साम्प्रदायिक दंगे हुए। रोहिंग्या मुसलमानों पर आरोप लगा कि ये बेहद उग्र हैं और उन्हें बौद्धों का साथ पसंद नहीं है।



म्यांमार का मानना है कि रोहिंग्या मुसलमान दरअसल बांग्लादेश से आकर बसे थे, इस नाते इन्हें म्यांमार की राष्ट्रीयता नहीं मिलनी चाहिए।

इससे पहले आरोप लगाए गए थे कि भारत के जम्मू-कश्मीर में रोहिंग्या मुसलमानों को अवैध तरीके से बसाया जा रहा है। जम्मू-सरकार ने रोहिंग्या मुसलमानों को वर्क परमिट दे रखा है।


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