राजद के अंदरुनी कलह से खतरे में पड़ सकता है महागठबंधन

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Updated on 22 May, 2016 at 12:12 pm

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बिहार में जिस बात का अंदेशा था, वही हो रहा है। सत्तारूढ़ राजद और जदयू के बीच बयानबाजी दिन ब दिन तीखी होती जा रही है। राजद के तीन बड़े नेताओं तस्लीमुद्दीन, प्रभुनाथ सिंह और रघुवंश सिंह ने राज्य में बढ़ रहे अपराध का हवाला देते हुए नीतीश कुमार पर हमला बोला है।

वहीं, राज्य के पूर्व मंत्री और जदयू नेता श्याम रजक ने नीतीश की आलोचना करने वाले तीनों नेताओं को हताशा से भरा शख्स बताया है। दूसरी तरफ, जदयू प्रवक्ता संजय सिंह ने राजद से तीनों नेताओं पर कार्रवाई करने की मांग की है।

तमाम बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोपों से अलग राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने खामोशी बनाए रखी है। तो क्या यह मान लिया जाए कि बिहार में महागठबंधन की राजनीति में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा?

हालांकि, विश्लेषक मानते हैं कि राष्ट्रीय जनता दल की अंदरुनी महात्वाकांक्षा की  राजनीति की वजह से जनता दल यू के साथ महागठबंधन खतरे में पड़ सकता है।


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रघुवंश प्रसाद, प्रभुनाथ सिंह और तस्लीमुद्दीन सरीखे कद्दावर नेता न केवल सत्ता से दूर हैं, बल्कि उन्हें अपनी पार्टी में ही वह अहमियत नहीं मिल रही है, जिसकी वे अपेक्षा रखते हैं। लालू यादव के करीबी माने जाने वाले रघुवंश गठबंधन से इस कदर नाखुश हैं कि उन्होंने यहां तक कह डाला कि यह समझौता चंद नेताओं के बीच हुआ है, न कि दो राजनीतिक दलों के बीच।

हालांकि, बाद में उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने उनके इस बयान को सिरे से खारिज कर दिया और इसे निजी विचार करार दिया।

पटना की राजनीति को समझने वाले विश्लेषक मानते हैं कि यह पार्टी में लालू प्रसाद यादव पर दबाव बनाने की रणनीति है। राजद के असंतुष्ट नेता राज्यसभा व विधान परिषद के चुनावों में दावेदारी जता रहे हैं, ताकि एकबार फिर सत्ता के केन्द्र में विराज सकें।

अब देखना दिलचस्प होगा कि वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में लालू यादव और नीतीश कुमार की क्या भूमिका होती है।

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