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अब माता-पिता के बचाव में कानून हाथ में लेना अपराध नहीं

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Updated: 6:27 pm 17 Jun, 2016

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अब माता-पिता के बचाव में कानून हाथ में लेना अपराध की श्रेणी में नहीं आएगा। दरअसल, सर्वोच्च न्यायालय ने अपने एक ऐतिहासिक फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि किसी व्यक्ति के माता-पिता या रिश्तेदार को कोई परेशान कर रहा है, तो उनके बचाव में वह कानून अपने हाथ में ले सकता है। इसे अपराध की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता है।

मामला राजस्थान का है। यहां के दो पड़ोसी विवाद के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। दरअसल, स्थानीय कोर्ट ने दोनों को विवाद तथा हाथापाई करने का दोषी पाते हुए दो साल की सजा सुनाई थी।


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राजस्थान हाईकोर्ट ने इस मामले में सजा बरकरार रखी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस शिव कीर्ति ने फैसले को पलट दिया।

फैसला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह सही है कि दोनों आरोपियों का अपने पड़ोसियों से विवाद हुआ था, लेकिन पुलिस ने इस बात की पड़ताल नहीं की कि आखिर उन्होंने ऐसा क्यों किया? दोनों आरोपियों के शरीर पर भी चोट के निशान थे।

सर्वोच्च अदालत ने फैसला सुनाया कि दोनों ने आत्मरक्षा में ऐसा किया, इसलिए उन्हें मामले से बरी किया जाता है।

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