रिक्शा चलाने वाले का बेटा जमैका में उसैन बोल्ट के क्लब में लेने जा रहा है ट्रेनिंग

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Updated on 3 Jan, 2018 at 4:02 pm

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सपने सच होते हैं। जी हां, निसार अहमद के साथ जो कुछ भी हुआ वो किसी सपने के सच होने जैसा है। दिल्ली के आजादपुर की बड़ा बाग झुग्गी में रहने वाले 16 साल के निसार रेसर हैं और बचपन से ही अपने इसी पैशन को जी रहे हैं।

 

अब आखिरकार उन्हें अपनी लगन और मेहनत का फल हासिल हुआ है। निसार अहमद को जमैका के प्रसिद्ध रेसर उसैन बोल्ट के क्लब में ट्रेनिंग के लिए दाख़िला मिल गया है।

 


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इस खबर को सुनकर उनका पूरा परिवार बेहद खुश है। निसार के पिता आजादपुर में रिक्शा चलाकर घर का खर्चा चलाते हैं और मां दूसरों के घर जाकर बर्तन धोने और झाड़ू-पोछा लगाने का काम करती है। दोनों की कमाई मिलाकर महज 5000 रुपए महीने होती है।

 

ऐसी परिस्थितियों में निसार को उम्मीद नहीं थी कि उन्हें कभी प्रोफेशनल ट्रेनिंग मिल पायेगी, अंतर्राष्ट्रीय स्तर की ट्रेनिंग तो दूर की बात है, लेकिन अब निसार के सपनों को पंख मिल गए हैं।



 

निसार को यहां तक पहुंचाने में गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया और स्पोर्ट्स मैनेजमेंट कंपनी एंग्लियन मैडल हंट का बड़ा योगदान रहा है। इन्होने केरल, तमिलनाडु, उत्तराखंड, ओडिशा और दिल्ली से कुल 14 बच्चों को इस ट्रेनिंग के लिए चुना, जिनमें निसार का नाम भी शामिल है। इसके बाद किंग्सटन क्लब ने इन सभी की क्षमता और प्रतिभा का आकलन करने का बाद चार सप्ताह के ट्रेनिंग की सहमति दी। अब उन्हें उसैन बोल्ट के कोच ग्लेन मिल्स निखारने का काम करेंगे।

 

 

निसार के लिए यहां तक पहुंचा आसान नहीं था। वह सबसे पहले खबर में तब आए, जब उन्होंने दिल्ली स्टेट एथलेटिक्स प्रतियोगिता में 100 और 200 मीटर स्प्रिंट प्रतियोगिता (तेज दौड़ प्रतियोगिता) में गोल्ड मेडल जीते। निसार की जीत इसलिए भी खास थी, क्योंकि उन्होंने अंडर 16 ऑल इंडिया रिकॉर्ड तोड़ा था।

निसार को ‘दिल्ली का उसैन बोल्ट’ कहा जाने लगा है। उन्होंने जो हासिल किया है वो न सिर्फ उनके और उनके परिवार के लिए उपलब्धि है, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व की बात है। निसार की कड़ी मेहनत और अपने जुनून के प्रति उनका समर्पण, वास्तव में पूरे देश के लिए एक प्रेरणा है।


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