अमीर लोग गरीबों से ज़्यादा जीते हैं, कितनी सच्चाई है इस बात में?

3:40 pm 8 Oct, 2018

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मेडिकल साइंस की तरक्की ने लोगों को नई ज़िंदगी दी है। पूरी दुनिया के लोगों की औसत उम्र बढ़ी है जिसकी वजह मेडिकल साइंस की तरक्की और बेहतर हेल्थ फैसिलिटीज़ हैं।

 

 

कई आंकड़े कहते हैं 1960 के आस-पास पैदा होने वाले लोगों की औसतन उम्र 52.5 साल हुआ करती थी, लेकिन आज औसत उम्र 72 साल है। ब्रिटेन में दशकों पहले से लोगों के जन्म और मौत का रिकॉर्ड रखा जाता है। इसे देखकर पता चलता है 1841 में पैदा हुई किसी बच्ची की औसत उम्र 42 साल होती है थी, जबकि किसी लड़के की 40 साल होती थी। वहीं 2016 में पैदा हुई किसी बच्ची के औसत उम्र 83 साल और लड़के के 79 साल हो गई यानी औसतम उम्र साफतौर पर बढ़ गई है।

 

 

माना जा रहा है कि मेडिकल साइंस के विकास और अच्छी स्वास्थ्य सुविधाओं ने इंसान की औसत आयु बढ़ाई है, लेकिन एक सच ये भी है कि औसत उम्र बढ़ी है, एक इंसान की उम्र नहीं। स्टैनफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी के एक इतिहासकार के मुताबिक, “औसत आयु बढ़ने और उम्र बढ़ने में बहुत फ़र्क है। लोगों की उम्र की बात करें, तो उसमें बहुत ज़्यादा बदलाव नहीं आया है।”


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इसे आप इस तरह समझ सकते हैं, औसत उम्र एक औसत है। यदि अगर किसी के दो बच्चे हैं और उनमें से एक की मौत हो जाती है और दूसरा बच्चा 70 साल तक जीता है, तो औसत उम्र 35 साल होगी। यानी औसत उम्र से सही तस्वीर सामने नहीं आती। दरअसल, एक सच ये भी है कि आज भी दुनिया के ज़्यादातर हिस्सों में शिशु मृत्युदर बहुत ज़्यादा है यानी बच्चे जन्म लेते ही मर जाते हैं।

 

 

ऐसा कहा जाता है अमीर लोग ज़्यादा जीते हैं। इसका एक कारण है पैसों की वजह से उनकी स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच होती है। इसलिए बड़ी बीमारी होने पर उनका बेहतर इलाज हो पाता है और उनकी जान बच जाती है। आकड़ों कहते हैं ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया के युग में महिलाएं औसतन 73 साल और पुरुष 75 साल तक जीते थे। आज भी कामकाजी तबके के लोगों की औसत उम्र 72 साल और महिलाओं की 76 साल है। यानी पुराने ज़माने से अब तक औसत उम्र कोई बहुत ज़्यादा नहीं बढ़ी है।

हां इतना ज़रूर है कि अमीर लोग मेडिकल साइंस की बेहतरीन सुविधाओं तक आसान पहुंच की वजह से गंभीर बीमारियों को भी मात दे देते हैं जिससे उनकी उम्र कुछ साल बढ़ जाती है।

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