पिछले चार साल में हजारों अरबपति छोड़ चुके हैं देश, यह है बड़ी वजह

Updated on 20 Apr, 2018 at 7:52 pm

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भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था से देश में अमीरों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। आज से कुछ दशक पहले की तुलना में आज हमारे देश में करोड़पति से लेकर अरबपतियों तक की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। किसी भी देश के नागरिकों की समृद्धि से ही देश की समृद्धि सुनिश्चित होती है। इस लिहाज से देखें तो देश में बढ़ते अमीरों की संख्या एक अच्छे संकेत की तरह नजर आती है, लेकिन हाल ही में आई एक रिपोर्ट से मामला कुछ और ही नजर आ रहा है।

 

 


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प्रमुख इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंसियल फर्म मॉर्गन स्टेनली के द्वारा पेश की गई रिपोर्ट से देश के बुद्धिजीवियों के माथे पर चिंता की लकीरें पड़ गई हैं। रिपोर्ट के अनुसार देश के धनकुबेर बेहद तेजी से भारत की नागरिकता छोड़ दूसरे देशों की नागरिकता हासिल कर रहे हैं।

 

 

इतने अरबपति कर चुके हैं पलायन

आपको यह जानकर हैरानी होगी कि साल 2014 से अब तक करीब 23  हजार अरबपति भारत की नागरिकता छोड़ दूसरे देशों की नागरिकता ले चुके हैं।

 

इनमें से 7000 ने तो साल 2017 में ही देश को अलविदा कहा है।

 



हाल ही में इस बिजनेस टाइकून ने छोड़ा देश

देश छोड़ने वालों की इस सूची में ताजा नाम मुंबई के बिजनेस टाइकून और रियल एस्टेट की दुनिया के बादशाह माने जाने वाले हीरानंदानी समूह के संस्थापक सुरेंद्र हीरानंदानी का है। हीरानंदानी ने भारत की नागरिकता छोड़ एक मध्य-पूर्वी देश साइप्रस की नागरिकता ले ली और वहीं जाकर बस गए हैं।

इस वजह से हीरानंदानी ने छोड़ी भारत की नागरिकता

मुंबई मिरर को देश छोड़ने की वजह बताते हुए हीरानंदानी ने कहाः

“भारतीय पासपोर्ट होने से नौकरी मिलने में काफी परेशानी होती है। टैक्स रेट या अन्य चीजों से मुझे कोई परेशानी नहीं है। मेरा बेटा हर्ष अभी भारत का ही नागरिक है और वह भारत में हमारा सारा कारोबार संभाल रहा है।”

 

इस पलायन को समझने और रोकने के लिए सरकार ने बनाई एक समिति

देश के अमीरों के बीच बढ़ते इस नए चलन को देखते हुए भारत के केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने मार्च में एक पांच सदस्यीय कमिटी का गठन किया है। जिसका मुख्य काम इस इन पलायनों से देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर का मुआयना करना है।

सीबीडीटी ने इस पलायन की मुख्य वजह स्पष्ट करते हुए कहा हैः

“हाल के दौर में एक अलग ही चलन देखने को मिला है। अमीर भारतीय अब पलायन कर दूसरे देश की नागरिकता ले रहे हैं। इस तरह का पलायन बहुत बड़ा जोखिम है क्योंकि टैक्स संबंधी कार्यों के लिए वे खुद को गैर-निवासी के तौर पर पेश कर सकते हैं, फिर चाहे भारत के साथ उनके कितने ही मजबूत व्यक्तिगत और आर्थिक संबंध क्यों न हों।”

इस तरह यदि देखा जाए तो टैक्स बचाने के उद्देश्य से देश के अमीर पलायन कर दूसरे देशों की नागरिकता हासिल कर रहे हैं। अब देखना यह है कि आँख खोलने वाली इस रिपोर्ट को हमारी सरकार कितनी गंभीरता से लेती है। आने वाले समय में यदि इस पलायन को नहीं रोका जाता है तो देश की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव भी पड़ सकता है। उम्मीद है कि सीबीडीटी अपनी नीतियों पर विचार करते हुए इस मामले का उचित समाधान जल्द ही निकाल लेगा।


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