ऑनलाइन ट्रांजेक्शन फ्रॉड में बढ़ोतरी, RBI ने उठाया ये बड़ा कदम

Updated on 7 Jul, 2017 at 12:54 pm

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पिछले पांच सालों के दौरान बैंकिंग फ्रॉड में 72% की बढ़ोतरी हुई है। कभी ग्राहकों की गलती तो कभी बैंकों के दोषपूर्ण सिस्टम के चलते नुकसान उठाना पड़ता है। ग्राहकों को ऑनलाइन ट्रांजेक्शन फ्रॉड से बचाने के लिए RBI ने ठोस कदम उठाया है।

आरबीआई ने कहा है कि अगर ग्राहक 3 दिन के भीतर अनऑथोराइज्ड इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग ट्रांजेक्शंस से हुए नुकसान की जानकारी देंगे तो उन्हें कोई नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा। ऐसा करने पर 10 दिन में संबंधित अकाउंट में पूरी रकम क्रेडिट हो जाएगी। वहीं, थर्ड पार्टी फ्रॉड की सूचना देने में अगर 4 से 7 दिन की देरी की जाती है, तो कस्टमर को 25 हजार रुपए तक का नुकसान उठाना पड़ेगा।

ग्राहकों की परेशानियों को देखते हुए आरबीआई ने गुरुवार को ऑनलाइन ट्रांजेक्शन फ्रॉड को लेकर नई गाइडलाइंस जारी कर दी है। इसके मुताबिक, अगर नुकसान अकाउंट होल्डर की गलती (पेमेंट से जुड़ी जानकारियां साझा करने) के कारण हुआ हो तो समय से बैंक को सूचना नहीं देने पर ग्राहक को पूरे नुकसान का बोझ उठाना पड़ेगा।


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अगर अनऑथोराइज्ड ट्रांजेक्शन की सूचना देने पर भी ग्राहक को नुकसान होता है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी बैंक की होगी। इसकी भरपाई बैंक को करनी होगी।

आरबीआई ने कहा कि थर्ड पार्टी फ्रॉड के मामले में ‘कस्टमर की जीरो लायबिलिटी’ होगी, जहां गलती न तो बैंक की हो, न ही कस्टमर की हो। बल्कि ऐसा सिस्टम की वजह से हुआ हो। कस्टमर को बैंक से अनऑथोराइज्ड ट्रांजेक्शन से संबंधित सूचना मिलने के बाद 3 कामकाजी दिनों के भीतर बैंक को इसकी सूचना देनी होगी।

RBI का ये कदम ग्राहकों के लिए राहत लेकर आया है। इस मामले में थोड़ी जागरूकता की भी जरूरत है, जिससे लोक सुरक्षित ट्रांजेक्शन कर सकें।

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