इन 7 हिंदू मान्यताओं के पीछे है दिलचस्प वजह, नहीं जानते होंगे आप!

Updated on 24 Apr, 2018 at 11:33 am

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बरसों से आप और हम कुछ मान्यताओं को मानते चले आ रहे हैं, क्योंकि हमारे बड़े बुज़ुर्गों ने कहा था कि ये हमारी परंपरा है इसलिए हम भी उसे आगे बढ़ा रहे हैं। मगर क्या कभी आपने सोचा कि इन परंपराओं को मानने की पीछे वजह क्या है? शायद नहीं। कुछ मशहूर हिंदू मान्यताओं के पीछे की सच्चाई हम आपको बताते हैं।

1. घर और दुकान के दरवाजे पर नींबू मिर्ची लटकाना

दुकान और घर के बाहर अक्सर लोग नींबू मिर्ची टांगते हैं। इसके पीछे मानय्ता है कि ऐसा करने से दुकान और बिज़नेस पर किसी की बुरी नज़र नहीं लगती और बुरी शक्तियां नींबू-मिर्ची लगाने के बाद अंदर प्रवेश नहीं कर पाती हैं। विज्ञान के मुताबिक, जिस कॉटन के धागे में नींबू और मिर्ची को पिरोया जाता है वो नींबू और मिर्ची की सुंगध को अवशोषित कर लेता है इसलिए उसकी महक से कीड़े-मकोड़े दुकान और घर से दूर रहते हैं। यानी ये बेहतरीन कीटनाशक का काम करता है।

 

2. सूर्यास्त के बाद झाड़ू नहीं लगाना

हिंदू धर्म में मान्यता है कि शाम को सूर्यास्त के बाद घर में झाड़ू नहीं लगाना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि इससे धन की हानि होती है। इसलिए हमारे बुज़ुर्ग दिन के समय ही घर की सफाई करते थे और इसी परंपरा को आगे बढ़ाया, ताकि आपकी कीमती चीज़ गायब न हो जाए।

 

3. सूर्यास्त के बाद नाखून न काटना

पुराने ज़माने में बिजली नहीं थी इसलिए शाम के समय नाखून काटना अच्छा नहीं माना जाता था, क्योंकि अंधेरे में नाखून काटने से हाथ कटने का भी डर रहता था। उसके बाद लोगों की मान्यता थी कि रात के अंधेरे में बुरी आत्मा इंसानी मांस की तलाश में आती है, ऐसे में शाम के वक़्त नाखून काटने से उन पर हमला कर देगी। इसलिए लोग शाम को नाखून काटने से बचते हैं। आजतक आपके घर में शायद बड़े-बुज़ुर्ग आपको ऐसा करने से रोकते होंगे।

 

Superstition

4. शुभ काम करने के पहले दही-शक्कर खान

नई नौकरी ढूंढ़ने जा रहे हो या परीक्षा में आज भी लोग दही-शक्कर खाकर जाते हैं। माना जाता है कि ऐसा करने से आप जिस काम के लिए जा रहे हैं वो पूर हो जाता है। दरअसल, हिंदू धर्म में दही को पांच अमृत में से एक माना गया है। दही खाने से मन खुश हो जाता है, जिससे कोई भी काम आप अच्छी तरह कर पाते हैं और सफेद चीज़ यानी शक्कर आपके मन को एकाग्र करने में मदद करता है। यानी आप ध्यान लगाकर अपना काम कर सकते हैं।


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5. मासिक धर्म के दौरान लड़कियों का कुछ काम न करना

20वीं सदी से पहले पेनकिलर्स नहीं बने थे, इसलिए पीरियड्स के दौरान दर्द से परेशान महिलाओं को काम नहीं करने दिया जाता था, ताकि उन्हें आराम मिल सके। मगर बाद महिलाओं की सहूलियत के लिए बने इस रिवाज़ को बाद में गलत तरीके से इस्तेमाल किया जाने लगा, जैसे उन दिनों महिलाएं अपवित्र हो जाती हैं, इसलिए उन्हें किचन में जाना चाहिए आदि।

 

6. कौआ को पूर्वज मानना

कौआ शनिदेव का वाहन है। शनिदेव कर्मों का फल देने वाले देवता माने जाते हैं। इसलिए श्राद्ध पक्ष के दौरान कौए को खाना खिलाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि कौए को खाना खिलाने से हमारे पूर्वजों /की भूख शांत होती है। माना जाता है कि त्रेतायुग से ही कौआ हमारा पूर्वज है। एक अन्य प्रसिद्ध मान्यता के अनुसार इंद्र के पुत्र जयंत ने एक बार कौए का रूप धारण करके देवी सीता को चोट पहुंचाई, जिसके बाद भगवान राम ने घास का तीर बनाकर जयंत की एक आंख फोड़ दी। अपनी गलती पर पछतावा करते हुए जयंत ने श्रीराम से माफी मांगी, जिसके बाद भगवान राम ने उन्हें वरदान किया कि जब कोई कौए को खाना खिलाएगा तो वो उनके पूर्वजों तक पहुंचेगा।

 

7. सांप को मारने के बाद उसका सिर कुचलना

ऐसी मान्यता है कि सांप को मारने के बाद उसका सिर कुचल देना चाहिए, वरना सांप के आंख में बनी छवि देखकर उसका कोई रिश्देतार सांप को मारने वाले व्यक्ति से बदला लेता है। दरअसल, मरने के बाद भी सांप किसी व्यक्ति को काट सकता है, जब तक उसका सिर न कुचला जाए। इसके अलावा सांप जैसे जीव के कई अंग काम करना बंद कर दे फिर भी वो घंटों जीवित रहते हैं और दर्द से तड़पते रहते हैं।

 

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