क्या सच में थे रावण के दस सिर? जानिए इससे जुड़ी रोचक बातें जो कम ही लोग जानते हैं

Updated on 19 Oct, 2018 at 12:57 pm

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रामायण ऐसा धर्म ग्रंथ है जो मनुष्य जीवन से बेहद निकट माना जाता है। भगवान श्रीराम ने अपने जीवन के माध्यम से जो संदेश देने की कोशिश की, वह हमें बेहतर इंसान बनने को प्रेरित करती हैं। इसीलिए तो उन्हें पुरुषोत्तम भी कहा गया है। वहीं दशानन रावण विद्वान और बलशाली होते हुए भी खलपात्र बनकर रह गया। रामायण की कथा तो आप जानते ही होंगे लेकिन क्या कभी इस पर गौर किया है आखिर रावण के पास सचमुच दस सिर थे क्या!

 

इस दशहरे पर आइए जानते हैं आखिर रावण के दस सिरों का राज क्या था।

 

दशहरे के दिन ही भगवान श्री राम ने रावण का वध किया था और इसीलिए देश के कई हिस्सों में इस दिन रावण दहन किया जाता है। रावण के पास कई अनोखे गुण थे। रावण के पास दस सिर का होना आश्चर्यचकित करता है। आखिर कोई दस सिर वाला व्यक्ति कैसे अपनी दिनचर्या का निर्वाह कर पाएगा। दस सिर होना रोमांचित भले करता हो, लेकिन ये प्रायोगिक नहीं लगता।

 

 


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विद्वानों की मानें तो दस सिर होने का सांकेतिक महत्व है। इससे ये पता चलता है उसका चित्त स्थिर नहीं था और एक साथ वो दस अलग-अलग विषयों पर सोचा करता था। वहीं जैन शास्त्रों में बताया गया है रावण 9 मणि अपने गले में धारण करता था लिहाजा उसके रावण के दस सिर  होने का भ्रम पैदा होता था।

 

ग्रह-नक्षत्रों सहित देवताओं को भी कैद करके रखने वाले रावण ने ब्रह्माजी का तप करते हुए अपने सिर हो दस बार यज्ञाहुति में अर्पित कर दिया था। उसके इस त्याग को देखते हुए ब्रह्माजी ने उन्हें दशानन होने का वरदान दिया।

 

 

ऐसे कई और तथ्य हैं जो रावण के चरित्र को रोचक बनाते हैं। रावण भगवान शिव का अनन्य भक्त था। उसने न केवल शिव स्तुति लिखी, बल्कि उसे संगीतबद्ध भी किया। उसके जैसा वीर पराक्रमी कोई नहीं था, लेकिन अहंकारवश उसने अपना सर्वनाश कर डाला। कहा जाता है  अहंकार भगवान का भोजन है और उसने भगवान से ही लोहा ले लिया था।

 

सबको बुराई पर अच्छाई की जीत के पर्व दशहरे की हार्दिक शुभकामनाएं!

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