टाटा ने लिया ‘अपमान’ का बदला; जगुआर लैन्डरोवर खरीदकर बचाया फोर्ड को।

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Updated on 31 Dec, 2015 at 3:17 pm

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वर्ष 1999 में टाटा समूह ने अमेरिकन कार निर्माता फोर्ड से पेशकश की थी कि वह उनके कार व्यवसाय का अधिग्रहण कर ले। लेकिन इस डील में कुछ इस तरह की परिस्थिति बन गई कि समूह के तात्कालीन प्रमुख रतन टाटा और उनकी टीम को ‘अपमानित’ होना पड़ा था। हालांकि, इस ‘अपमान’ का बदला उन्होंने 9 साल बाद लिया।

दरअसल, अपने कार व्यवसाय को बेचने के लिए फोर्ड के दरवाजे तक गए रतन टाटा से बिल फोर्ड ने कहा थाः “जब आपको पैसेन्जर कार के बारे में कुछ नहीं पता था तो आपने इसे शुरू ही क्यों किया। हम इसे खरीदकर आप पर अहसान ही करेंगे।” फोर्ड और टाटा समूह के अधिकारियों के बीच यह बैठक अमेरिका के डेट्रॉयट शहर में हुई थी।

वर्ष 1998 में टाटा मोटर्स की कार इन्डिका के खराब प्रदर्शन के बाद समूह ने कार बिजनेस से अपना हाथ खींच लेने की सोची थी और इसी क्रम में इसके अधिकारी फोर्ड कंपनी से बात करने गए थे।


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इस घटना के 9 साल बाद फोर्ड की घाटे में चल रही जगुआर लैन्डरोवर कार व्यवसाय का अधिग्रहण कर टाटा ने फोर्ड को बरबाद होने से बचा लिया। आइकोनिक ब्रिटिश कार ब्रान्ड जगुआर लैन्डरोवर लगातार घाटे में जा रही थी और जब टाटा समूह ने ने इसका अधिग्रहण किया था, तब 50 करोड़ डॉलर का घाटा हुआ था। इसे उत्तम लग्जरी कार ब्रान्ड माना जाता है।

वर्ष 2008 में जब टाटा समूह ने जगुआर लैन्डरोवर का अधिग्रहण कर लिया है, उस वक्त फोर्ड के चेयरमैन बिल फोर्ड ने रतन टाटा को धन्यवाद देते हुए कहाः “आप जगुआर लैन्डरोवर खरीदकर हम लोगों पर अहसान कर रहे हैं।”

फोर्ड ने जगुआर को 2.5 बिलियन डॉलर में और 2.7 बिलियन डॉलर में खरीदा था, पर वह कई कारणों से इन्हें चलाने में समर्थ नहीं रही थी।

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