आपके अकाउंट में जल्द आने जा रहे हैं 15 लाख रुपये! कैसे करेंगे खर्च?

Updated on 19 Dec, 2018 at 2:19 pm

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हाल ही में पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में भाजपा को करारी शिकस्त मिली। इन चुनावों में भाजपा की ऐसी बुरी पराजय होगी इस बात का अंदाज़ा शायद ही किसी ने लगाया हो। खुद विपक्षी खेमा भी अपनी जीत को लेकर इतना आश्वस्त नहीं था। इन नतीजों से कहीं न कहीं अब भाजपा को साल 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों का डर सताने लगा है। अंतरखाने पार्टी को इस बात का अंदाज़ा लग चुका है आगामी लोकसभा चुनावों के लिए पार्टी को अभी से ही कमर कसनी होगी, लिहाज़ा साल 2019 के लोगसभा चुनावों से पहले सभी को 15-15 लाख रुपये देने वाला जुमला एक बार फिर गूंजने लगा है।

 

 


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इस बार ये शिगूफ़ा केंद्रीय मंत्री रामदास उठावले ने छोड़ा है। महाराष्ट्र के सांगली में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रामदास आठवले ने सभी के खाते में 15-15 लाख रुपये डालने की बात कही।

 

उनका कहना है सरकार लोगों को 15 लाख रुपये देने के लिए आरबीआई से पैसा मांग रही है, लेकिन बैंक पैसा नहीं दे रहा। अपने बयान में उठावले ने कहा लोगों के अकाउंट में 15 लाख रुपये धीरे-धीरे आएंगे, एक साथ नहीं।

 

 

बीते लोकसभा चुनावों में भाजपा ने कई प्रभावी और चमकदार जुमले छोड़े थे, जिसके लिए अब तक उसकी तीखी आलोचना हो रही है। उस वक्त पीएम मोदी ने लोगों से देश में काला धन लाकर हर परिवार के खाते में 15-15 लाख रुपये डालने की बात कही थी। लेकिन कुछ समय बाद ही इस बात के राजनीतिक अर्थ निकाले जाने लगे। बीते लगभग चार साल से काले धन और सभी को 15-15 लाख रुपये देने को लेकर विपक्ष सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है। धीरे-धीरे ये चुनावी जुमला आम से अहम हो गया है।



 

 

कुछ समय पहले खुद भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह ने नरेंद्र मोदी के काला धन वापस लाकर हर परिवार के खाते में 15-15 लाख रुपये डालने की बात महज़ एक चुनावी जुमला बताई थी। उन्होंने इस बात को साफ़ करते हुए कहा था मोदी ने 2014 में जब ये बात कही थी तो उनके कहने का आशय था काले धन का इस्तेमाल देश की गरीब आबादी के लिए उपयोगी योजनाएं बनाकर किया जाएगा, न की उनके खाते में 15-15 लाख डालकर।

 

 

प्रधानमंत्री मोदी का वादा पूरा करने की तारीख पर कोई भी सवाल खड़ा करना शायद बेईमानी होगी, क्योंकि ये सूचना का अधिकार के दायरे में नहीं आता।


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