रसोइए का बेटा पासिंग आउट परेड में ‘स्वॉर्ड ऑफ ऑनर’ जीतकर बना भारतीय सेना में अफ़सर

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Updated on 13 Jun, 2016 at 3:49 pm

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कुमाऊं रेजीमेंटल सेंटर में रसोइए गोपाल सिंह बिष्‍ट के बेटे राजेंद्र सिंह बिष्‍ट ने पिता का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया। दरअसल, राजेंद्र सिंह बिष्ट को अकादमी के नियमित पाठ्यक्रम में सबसे बेहतरीन ऑलराउंडर क़ैडेट घोषित किया गया। उन्हे प्रतिष्ठित ‘स्वॉर्ड ऑफ ऑनर’ से सम्मानित किया गया है। राजेंद्र सिंह बिष्ट ने मेरिट में तीसरा स्थान पाकर यह उपलब्धि हासिल की है।

उत्तरप्रदेश के बरेली जिले में जन्मे बिष्ट, एक मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखते हैं। बिष्ट मूलतः कुमाऊं रेजिमेंटल सेंटर के गढ़ रानीखेत से भी नाता रखते हैं। बिष्ट के पिता भी सेना में अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। वह ‘ऑफिसर्स मेस’ में कुक(रसोइया) के पद पर तैनात हैं।

बिष्ट बचपन से ही सेना में जाने का सपना देखते हुए बड़े हुए। रेजिमेंट सेंटर के हमेशा ही करीब रहने के कारण वह खुद को सौभाग्यशाली मानते हैं। वह अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता गोपाल सिंह बिष्ट और मां विमला देवी को देते हैं। सैनिक स्कूल ,घोड़ाखाल के छात्र रहे बिष्ट कहते हैं कि कड़ी मेहनत ही एकमात्र विकल्प है, जिससे वांछित लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सकता है।

बिष्ट आगे कहते हैं कि देश के युवाओं को आगे बढ़कर सेना में शामिल होना चाहिए, क्योंकि यह महानतम सेवाओं में से एक है। आईएमए को ज्वाइन करने से पहले, बिष्ट राष्ट्रीय रक्षा अकादमी(NDA) में कांस्य पदक विजेता थे।

अकादमी कैडेट एडजुटेंट (एसीए) के अकादमी में स्वर्ण पदक के साथ प्रथम स्थान पाने वाले दिल्ली के अमन ढाका बटालियन अंडर ऑफिसर हैं और उनका भी सपना था कि इंडियन आर्मी में अपनी सेवा प्रदान करें।

अमन भी अपनी सफलता के पीछे अपने पिता का हाथ बताते हैं, जो हमेशा उन्हें प्रोत्साहित करते रहते हैं। अमन कहते हैं कि यह दिन उनके लिए बहुत ही ख़ास है। सेना में शामिल होना उनका सपना पूरा होने जैसा है।

वहीं, रजत पदक विजेता सीनियर अंडर आफिसर एन दिनेश कुमार तमिलनाडु से सैनिक स्कूल के एक पूर्व छात्र हैं और इस सम्मान से वो खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।


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