गांधी-नेहरू सिलेबस से नदारद, राजस्थान सरकार पर इतिहास बदलने का आरोप

Updated on 27 Jul, 2017 at 1:07 pm

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ऐसे दौर में हम जी रहे हैं जो कि राजनीति से लबालब भरी हुई है। जहां-तहां इसका प्रकोप फ़ैल रहा है। अब ये सिलेबस तक को अपनी जद में ले रहा है तो आरोप-प्रत्यारोप लाजमी हो जाता है।

वाकया राजस्थान का है जहां इतिहास के सिलेबस को बदला जा रहा है। सिलेबस को एक तरफ गांधी-नेहरू से परहेज है, तो दूसरी तरफ मुगल शासकों से घृणा है। राजस्थान के भाजपा सरकार के इतिहास बदलने के कदम की खूब आलोचना हो रही है।


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राज्य सरकार ने महाराणा प्रताप के इतिहास को अलग अंदाज में पेश किया है। 10वीं कक्षा के छात्रों के लिए तैयार की गई सामाजिक विज्ञान की नई किताब में महाराणा प्रताप को 1576 में हल्दीघाटी की लड़ाई में अकबर को पराजित बताया है। छात्र अब तक यह पढ़ते आ रहे थे कि इस लड़ाई में मुग़ल विजयी हुए थे।

स्कूल ही नहीं राजस्थान यूनिवर्सिटी के इतिहास विभाग ने भी इतिहास के दो सेक्शन्स के नाम में बदलाव किए हैं। विभाग ने ‘प्राचीन इतिहास’ (600 BC- 1200AD) का नाम बदलकर ‘गोल्डन एरा ऑफ इंडिया’ नाम दिया है वहीं ‘मध्यकालीन इतिहास’ (1200 AD- 1700AD) के नाम को बदलकर ‘स्ट्रग्लिंग इंडिया’ कर दिया है।

आजादी के इतिहास को नये शक्ल में पेश किया गया है। देश के पहले प्रधानमंत्री सिलेबस से नदारद है तो गांधी की ह्त्या को गायब ही कर दिया गया है। वहीं, आरएसएस विचारक सावरकर को महान क्रांतिकारी और महान देशभक्त बताया गया है। राजनीतिक विज्ञान की किताब में कांग्रेस को अंग्रेजों की पैदा की गई संस्था के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि सुझावों को ध्यान में रखा जाएगा। हम कुछ ऐसा नहीं करेंगे जिससे समस्या खड़ी हो। हम देश के वीर सपूत और साहित्यकारों का सम्मान करते हैं। ज्ञात हो कि स्कूली पाठ्यपुस्तकों से रवींद्रनाथ टैगोर की रचनाओं को हटाने के भी आरोप लगाए गए थे।

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