इस शख्स ने निकाला पानी की समस्या का तोड़, 23 सालों से सिर्फ बारिश के पानी का कर रहा इस्तेमाल

Updated on 5 Oct, 2018 at 3:07 pm

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भारत की जनसंख्या जिस विस्फोटक गति से बढ़ रही है उससे आने वाले समय में प्राकृतिक संसाधनों के खत्म होने का खतरा मंडरा है। एक बेहद अहम प्राकृतिक संसाधन पानी की समस्या तो अभी से शुरू हो चुकी है। कई बड़े शहरों में लोगों के पास पीने का साफ पानी नहीं और उन्हें पानी खरीदना पड़ रहा है। ऐसे में एक शख्स ऐसा भी है, जिसने इस समस्या से निपटने का उपाय ढूंढ़ निकाला है और दूसरों को इनसे प्रेरणा लेनी चाहिए।

 

 

एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में 76 मीलियन लोगों के पास पीने का साफ पानी उपलब्ध नहीं है। वहीं, एक दूसरी रिपोर्ट के मुताबिक,  2022 तक बेंगलुरू और दिल्ली जैसे महानगरों में ज़मीन के नीचे का पानी खत्म हो जाएगा। बेंगलुरू में तो जल संकट काफी समय पहले से ही शुरू हो चुका है, यहां लोगों को पीने का पानी खरीदना पड़ता है। कुछ समय पहले ही भारत के मशहूर टूरिस्ट स्थल शिमला में भी लोगों के पास पीने का पानी नहीं था। विकास की अंधाधुंध रेस में जिस तरह से प्राकृतिक संसाधनों को दोहन हुआ है ये समस्या तो आनी ही थी, मगर बावजूद इसके इस समस्या का गंभीरता से हल नहीं निकाला जा रहा।

 

 


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हालांकि, एक ऐसा शख्स है जिसे पानी की चिंता है तभी तो उसने पानी का ऐसा विकल्प निकाला है कि न तो उसे बिल भरना पड़ता है और न ही पानी खत्म होने की चिंता सताती है। ये शख्स हैं ए. आर. शिवकुमार, जो साइंटिस्ट हैं। शिवकुमार रेन वॉटर हार्वेस्टिंग (बारिश के पानी को जमा करना) के ज़रिए अपनी पानी की ज़रूरत को पिछले 23 सालों से पूरा कर रहे हैं।

 

 

उनका कहना है कि उन्हें सप्लाई के पानी की ज़रूरत नहीं पड़ती, क्योंकि वो बारिश के पानी को जमा कर लेते हैं जिसे पूरे साल उनका काम चल जाता है। हालांकि, ये सब करना उनके लिए आसान नहीं था। 1995 में अपना घर बनाने से पहले उन्होंने इसपर काफी रिसर्च किया। उनके लिए बारिश के 60-70 दिनों के पानी को पूरे साल चलाना एक चुनौती थी, लेकिन उन्होंने इस चुनौती को स्वीकार करते हुए समस्या का हल निकाल ही लिया। शिवकुमार ने पॉप अप फिल्टर (Pop-Up Filter) नामक एक टूल बनाया, जो सिल्वर शीट का इस्तेमाल करके बारिश के पानी को बिल्कुल साफ कर देता है।

 

 

शिवकुमार की तरह यदि हर घर में बारिश के पानी का ऐसा ही इस्तेमाल किया जाने लगे तो यकीनन पानी की समस्या काफी बड़े पैमाने पर हल हो सकती है।

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