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वह कूड़ा-कचरा बीनकर कमाती थी दिन के 5 रुपए, आज है करोड़ों की मालकिन

Published on 17 December, 2015 at 10:11 am By

मंजुला वाघेला एक ऐसा नाम है जो आज कई लोगों के लिए प्रेरणास्त्रोत बन गया है। गुजरात के अहमदाबाद में कभी कूड़ा-कचरा बीनने वाली मंजुला आज एक कंपनी की मालकिन है, जिसका सालाना टर्नओवर 1 करोड़ रुपए है।


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एक वक़्त ऐसा था जब मंजुला घर-घर जाकर, सड़कों पर कूड़ा-कचरा बीनकर अपना गुज़ारा करती थी। 1981 तक उन्हें दिन भर काम करने के सिर्फ 5 रुपए मिलते थे। और मंजुला के लिए यह सफर तय करना इतना आसान नहीं था।

मंजुला की सफाई संस्था ‘सौंदर्य मंडली’ से सबसे पहले 40 महिलाएं जुड़ी। यह संस्था कंपनियों को सफाई कार्य की सेवा मुहैया कराती थी। इस संस्था की स्थापना इलाबेन भट्ट् की संस्था ‘सेल्फ एंप्लॉयड वुमेन्स एसोसिएशन’ (SEWA) के संपर्क में आने के बाद हुई।और फिर मंजुला ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। इस तरह से ‘श्रीसौन्दर्य सफाई उत्कर्ष सहकारी मंडली लिमिटेड’ की शुरुआत हुई।

Saundarya Mandali

सौंदर्य मंडली yourstory

आज मंजुला वाघेला इस को-ऑपरेटिव की मुखिया है। इसमें लगभग 400 सदस्य कार्यरत है और ये 45 संस्थाओं और कई सोसाइटीज को साफ़-सफाई की सेवाएं मुहैया कराते हैं। मंजुला बताती हैः



“हमें सबसे पहले नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन (NID) ने काम दिया। उसके बाद फिजिकल रिसर्च लैब ने हमारी संस्था की 15 महिलाओं को हायर किया। पांच साल तक लगातार कोशिशों के बाद हमारी समिति का रेजिस्ट्रेशन हुआ। इसमें इतना लंबा समय इसलिए लगा क्योंकि हमारा स्वयं सहायता समूह न तो कोई उत्पाद बेच रहा था और न ही सेवाएं दे रहा था।”

मंजुला के इस को-ऑपरेटिव का टर्नओवर सालाना एक करोड़ रुपए है, लेकिन उनके इरादे इससे कहीं और आगे जाने का है। मंजुला इस उपलब्धि पर कहती हैंः

“1 करोड़ का टर्नओवर होना उनके लिए एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन अब अगला लक्ष्य अशिक्षित महिलाओं को टेक सेवी बनाना है, जिससे वह कुशलता के साथ ई-टेंडरिंग भी कर सकें।”


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इस को-ऑपरेटिव में काम करने वाली महिलाओं में से ज़्यादातर महिलाएं पहले रद्दी बीनने का काम करती थी। हालांकि, अब वह टाट के बोरों की जगह, सफाई के आधुनिक उपकरणों जैसे सड़क और फर्श क्लीनर, वैक्यूम क्लीनर, माइक्रो फाइबर मॉप्स, हाई-जेट प्रेशर, आदि उपकरणों से लैस हैं।


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जहाँ मंजुला आज 60 बरस की है, जिन्होंने अपने बीते कल में कई मुश्किलों का सामना किया, उन्होंने इस बात को सुनिश्चित किया कि उनका बेटा शिक्षा ले। आज मंजुला को एक डॉक्टर की माँ होने का गर्व है।

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