भारत की पहली महिला मर्चेंट नेवी कैप्टन ने जीता अंतर्राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार

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Updated on 22 Dec, 2016 at 3:20 pm

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भारतीय मर्चेंट नेवी की पहली महिला कप्तान राधिका मेनन को समुद्र में विशिष्ट बहादुरी के लिए अंतरराष्ट्रीय मैरीटाइम संस्था (आईएमओ) की तरफ़ से वीरता पुरस्कार दिया गया है। उन्होंने अपनी जान जोखिम में डाल कर बंगाल की खाड़ी में सात मछुआरों की जान बचाई थी। इन मछुआरों की नाव पिछले साल जून में आंध्र प्रदेश के समुद्र तट के पास  इंजन ख़राब होने और लंगर छूटने के कारण समुद्र में एक हफ्ते तक फंसी रही थी।

कैप्टन राधिका न सिर्फ इंडियन मर्चेंट नेवी की पहली महिला कप्तान हैं, बल्कि पहली महिला भी हैं, जिन्हें समुद्र में लोगों को बचाने के लिए यह वीरता सम्मान दिया गया है।

कैप्टन राधिका को यह सम्मान पिछले हफ्ते अंतरराष्ट्रीय मैरीटाइम संस्था की तरफ़ से लंदन में दिया गया। अंतरराष्ट्रीय मैरीटाइम संगठन (आईएमओ) संयुक्त राष्ट्र विशेषीकृत एजेंसी है, जिसपर जहाज़रानी की सुरक्षा और जहाजों द्वारा समुद्री प्रदूषण की रोकथाम की जिम्मेदारी है।

पिछले साल जून में तेल के एक विशाल टैंकर ‘संपूर्ण स्वराज’ का कमांड कैप्टन राधिका मेनन के पास था। समुद्र के बीच नौ मीटर ऊंची लहरें और 60 से 70 समुद्री मील की गति से बह रही हवाओं से जूझते हुए कैप्टन राधिका  ने इन सात मछुआरों को बचाने के लिए एक राहत अभियान शुरू करने का निर्देश दिया था। इन मछुआरों के पास से खाना और पानी बह चुका था और वे बर्फ और कोल्ड स्टोरेज पर ज़िंदा थे।

संपूर्ण स्वराज टैंकर पर बचाए गए मछुआरों के साथ कैप्टन राधिका मेनन bbci

संपूर्ण स्वराज टैंकर पर बचाए गए मछुआरों के साथ कैप्टन राधिका मेनन bbci


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खबरों के मुताबिक, 15 से 50 साल तक के इन कमज़ोर और मरणासन्न मछुआरों को बचाना काफी संघर्ष भरा काम था। तेज़ तूफान और भारी बारिश के बीच तीन बार की कोशिश के बाद इन्हें बचाया जा सका। इस घटना के बारे में राधिका बताती हैंः 



“समुद्र में काफ़ी उथल-पुथल मची हुई थी और दो- तीन दिन तक काफ़ी दबाव बना रहा जो कि गहरे दबाव में तब्दील हो गया। यह काफ़ी मुश्किल काम था, लेकिन हमें यह करना ही था। क्योंकि अगर हम ऐसा नहीं करते तो मुझे पता था कि इन मछुआरों का बचना मुमकिन नहीं था।”

कैप्टन राधिका मेनन इंडियन मर्चेंट नेवी में कैप्टन बनने वाली पहली महिला हैं. vesselfinder

कैप्टन राधिका मेनन इंडियन मर्चेंट नेवी में कैप्टन बनने वाली पहली महिला हैं. vesselfinder

बहादुरी का यह सम्मान जीतने वाली पहली महिला होने पर राधिका कहती हैं कि जिस तरह के जहाज़ों पर वो काम करती हैं, वहां महिला या पुरुष होने से कोई फ़र्क नहीं पड़ता। वे बताती हैं कि अगर आप महिला हैं तो भी आपको पता होना चाहिए कि आपको काम किस तरह से करना है।


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