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जानिए किस श्राप के कारण हुआ था पृथ्वी पर राधा जी का जन्म

Published on 1 October, 2018 at 10:59 am By

राधा-कृष्ण। श्री कृष्ण की हैं राधा और राधा के हैं श्री कृष्ण। इसलिए सारे जाग में इनके रिश्ते को पवित्र माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि राधा श्री कृष्ण की आत्मा है। यदि आप किसी से सामान्यतः यह प्रश्न करें कि ‘राधा कौन थीं’, तो ज़रूर यह जवाब मिलेगा कि वह उनकी प्रेमिका थी, लेकिन बहुत कम ही लोग जानते होंगे कि राधा का जन्म किसी महिला की कोख से नहीं हुआ था, बल्कि यह एक चमत्कार था।

ब्रह्मवैवर्त पुराण में देवी राधा के जन्म से संबंधित एक बेहद रोचक कथा बताई गयी है। इस पुराण के अनुसार, राधा जी भी श्रीकृष्ण की तरह ही अनादि और अजन्मी हैं। आइए आज इस लेख से जानते हैं कि राधा जी भू लोक पर कैसे अवतरित हुईं।

राधा-कृष्ण


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भगवान श्रीकृष्ण का निवास गोलोक में है, इसलिए उन्हे गोलोक विहारी भी पुकारा जाता है। राधा जी का भी निवास स्थान गोलोक ही है। ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, राधा भी श्रीकृष्ण की तरह ही अनादि और अजन्मी हैं। इस पुराण में वर्णित है कि एक बार देवी राधा गोलोक में नहीं थीं तब श्री कृष्ण अपनी एक अन्य सखी के साथ विहार कर रहे थे। जब राधा जी को इसकी सूचना मिली तो वह गोलोक लौट आईं।

राधा क्रोधित मुद्रा में श्री कृष्ण के पास गयी और उन्हें खरी कोटि सुनने लगी। पौराणिक कथा अनुसार यह सब सुनकर लज्जावश विरजा नदी बनकर बहने लगी। राधा जी ने क्रोधवश श्री कृष्ण को भी बहुत कुछ कह दिया। श्रीकृष्ण के प्रति राधा का क्रोध देखकर कान्हा के मित्र श्रीदामा को बुरा लगा और उन्होने आवेश में आकर राधा जी को अपमानित किया, जिससे राधाजी नाराज़ हो गईं। सुदामा के इस बर्ताव से कुपित होकर राधा ने कहा- “श्रीदामा! तुम मेरे हृदय को सन्तप्त करते हुए असुर की भांति कार्य कर रहे हो, अतः तुम असुरयोनि को प्राप्त हो।

 

 



सखा कृष्ण से बिछड़ने का गम श्रीदामा से सुना नहीं गया। श्रीदामा ने भी आवेश में आकर राधा को श्राप दे दिया।

“गोलोकेश्वरी ! तुम्हारे श्राप से मैं खुद को बहुत तुच्छ समझ रहा हूं मुझे असुरयोनि प्राप्ति का कतई दुःख नहीं है, पर मैं कृष्ण वियोग से तप्त हो रहा हूं। इस वियोग का तुम्हें अनुभव नहीं है। अतः एक बार तुम भी इस दुःख का अनुभव करो। सुदूर द्वापर में श्रीकृष्ण के अवतरण के समय तुम भी अपनी सखियों के साथ गोप कन्या के रूप में जन्म लोगी और श्रीकृष्ण से विलग रहोगी।”

 

राधा-कृष्ण की यह कहानी यह शाप नहीं, अपितु वरदान है।

राधा जी श्राप देकर श्रीदामा जी चले गये। उनके जाने के बाद राधा जी को अपनी गलती का एहसास हुआ। श्री कृष्ण से वियोग की बात सोच कर ही वो कांप उठी। राधाजी को भयवेश देख लीलाधारी कृष्ण उनके पास आए और अपनी मधुर मुस्कान के साथ उन्हे सांत्वना दी और बोले “हे देवी ! यह शाप नहीं, अपितु वरदान है। इसी निमित्त से जगत में तुम्हारी मधुर लीला रस की सनातन धारा प्रवाहित होगी, जिसमे नहाकर जीव अनन्तकाल तक कृत्य-कृत्य होंगे। इस प्रकार पृथ्वी पर श्री राधा का अवतरण द्वापर में हुआ।”

 

 


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संसार की दृष्टि में राधा की माता कीर्ति गर्भवती हुईं लेकिन उनके गर्भ में राधा ने प्रवेश नहीं किया। कीर्ति ने अपने गर्भ में वायु को धारण कर रखा था और योगमाया के सहयोग से कीर्ति ने वायु को जन्म दिया लेकिन वायु के जन्म के साथ ही वहां राधा कन्या रूप में प्रकट हो गईं। इसलिए यह माना जाता है कि देवी राधा अयोनिजा थीं। वहीं, राधा जी के श्राप के कारण श्रीदामा शंखचूर नाम के दानव हुए, जिनका वध भगवान शिव ने किया| राधा-कृष्ण की यह कथा आपको कैसी लगी, हमें जरूर बताएं।

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