महज 12 साल की उम्र में इस लड़के ने रचा इतिहास, बना शतरंज का सरताज

Updated on 27 Jun, 2018 at 9:46 am

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प्रतिभा अवसर की मोहताज होती हैं, ऐसा अक्सर सुनने को मिलता है लेकिन कुछ प्रतिभाओं को अवसरों से कोई फर्क नहीं पड़ता है। खेल के मामले में तो ये स्पष्ट है कि खिलाड़ी को खुद ही साबित करना होता है, वह भी सीमित समय में। ऐसा ही एक 12 साल का लड़का खेल की दुनिया में तेजी से मशहूर हो रहा है।

 

शतरंज दिमाग का खेल है।

 

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आर प्रग्नानंधा बाएं हाथ से खेलकर शतरंज का सरताज बन गया है। शह और मात के खेल में उस्तादों को भी पछाड़ने में उसे महारत हासिल है। चेन्नई के इस खिलाड़ी ने दुनिया के दूसरे सबसे छोटे ग्रैंडमास्टर का ख़िताब अपने नाम किया है। प्रग्नानंधा ने इटली में हुए चौथे अंतर्राष्ट्रीय चेस फेस्टिवल का नौवां राउंड जीतने का कीर्तिमान हासिल किया है।

 

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ये जीत और भी ख़ास हो गई, जब शतरंज के शहंशाह विश्वनाथन आनंद ने ट्वीट कर उसे बधाई दी। विश्वनाथन आनंद 18 साल की उम्र में गैंडमास्टर बने थे। प्रग्नानंधा के कोच आरबी रमेश ने इसे एक बड़ी उपलब्धि बताया है। उन्होंने भरोसा जताया है कि प्रग्गू को कुछ अच्छे प्रायोजक मिलें, जिससे कि उसे मदद मिल सके।

 



 

सबसे युवा ग्रैंडमास्टर रिकॉर्ड यूक्रेन के सर्गे कारजाकिन (12 साल 7 महीने) के नाम है तो आर प्रग्नानंधा दूसरे नंबर पर हैं। इसके साथ ही उजबेकिस्तान की नोदिरबेक, भारत की परिमार्जन नेगी तथा नॉर्वे की मैगनस तीसरे, चौथे तथा पांचवें स्थान पर हैं। बताते चलें कि प्रग्नानंधा की बहन वैशाली भी एक चेस प्लेयर हैं, जिनसे उन्होंने शुरुआती शतरंज खेलना सीखा है। प्रग्नानंधा की इस सफलता ने शतरंज के क्षेत्र को एक और सितारा दिया है, जिसे सही मार्गदर्शन और सहयोग की जरूरत है!

 

 

हम प्रग्नानंधा के उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हैं। शतरंज जैसे दिमागी खेल को इस देश में और भी बढ़ावा देने की जरूरत है, ताकि प्रतिभाएं आगे आ सकें!


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