कुतुब मीनार वास्तव में ध्रुव स्तंभ है जिसका इस्तेमाल ग्रह-नक्षत्र की खोज के लिए होता था!

Updated on 31 Aug, 2018 at 5:55 pm

Advertisement

कुतुब मीनार ईंट से बनी हुई दुनिया की सबसे ऊंची मीनार है। नई दिल्ली मे स्थित इस ऐतिहासिक इमारत को देखने के लिए देश-विदेश से लोग आते हैं। माना जाता है कि 73 मीटर ऊंची इस इमारत का निर्माण गुलाम वंश के कुतुबद्दीन एबक ने करवाया था। कुतुब मीनार दिल्ली के मुख्य आकर्षण स्थलों में से एक है।

ईंटों से बनी हुई दुनिया की सबसे ऊंची मीनार।

हालांकि, जैसा कि भारत में मौजूद अधिकांश ऐतिहासिक स्थलों के साथ कुछ न कुछ रहस्य और विवाद जुड़े हुए हैं, कुतुब मीनार से भी जुड़ा एक सच है, जिसके बारे में कोई नहीं जानता। जानकारों के मुताबिक कुतुब मीनार का निर्माण एक हिंदू इमारत को ध्वंश करने किया गया था।

कुतुब मीनार परिसर में 27 हिंदू व जैन मंदिर थे। उन्हें ध्वस्त कर दिया गया। भग्न मंदिरों के अवशेष अब भी दिखते हैं।


Advertisement

यह पूरी तरह साफ है कि कुतुब मीनार परिसर में कई हिंदू ढांचे, चिह्न व अवशेष हैं। यहां तक कि कुवत-उल-इस्लाम मस्ज़िद जिस  स्तंभ पर खड़ा है, वह भी कभी हिंदू सरंचना का हिस्सा रहा था। दरअसल, इस मस्जिद में 27 हिंदू और जैन मंदिरों की सामग्री का इस्तेमाल हुआ है और इसके सुशोभित स्तंभ इस बात की गवाही देते हैं। इस बात की जानकारी भारत सरकार द्वारी जारी की गई पट्टिका में भी दी गई है।

विशेषज्ञ कहते हैं कि कुतुब मीनार दरअसल ऐतिहासिक ध्रुव स्तंभ है। आपको बता दें कि प्राचीन काल में ध्रुव स्तंभ का इस्तेमाल खगोलीय अवलोकन के लिए किया जाता था। इस परिसर में जिन 27 मंदिरों को ध्वस्त किया गया वे वास्तव में हिंदू राशि चक्र 27 नक्षत्रों के लिए बनाए गए मंडप थे।

कुतुब मीनार परिसर पूरी तरह हिन्दू व जैन मंदिरों के ढांचे से पटा हुआ है।



जब एबक ने मंदिरों को ध्वस्त किया तो स्तंभ कहा गएं?

विशेषज्ञों का मानना है कि मीनार में उन्हीं मंदिरों के स्तंभ लगे हैं। बस उन्हें इस्लामिक सरंचना की तरह दिखाने के लिए थोड़े-बहुत बदलाव किए गए हैं। उनका तर्क है कि हेलीकॉप्टर से देखने पर स्तंभों पर कमल के प्रतीक दिखते हैं।

कुतुब मीनार ऊपर से ऐसा दिखता है। कमल के फूल की तरह।

कुतुब मीनार को ध्रुव स्तंभ बताने वालों का कहना है कि किसी भी इस्लामिक सरंचना में कुतुब मीनार के स्तंभों (सुसज्जित) जैसी शैली नहीं है। सभी इस्लामिक स्तंभ में सपाट सतह ही हैं, जिन पर कैलीग्राफी की हुई है। कुतुब मीनार इनसे काफी अलग दिखता है।

यह मीनार हिंदू स्थापत्य कला के नमूने की तरह दिखता है। इसे इस्लामिक दिखाने के लिए इसमें थोड़ा-बहुत बदलाव किया गया है।

अरबी में ‘कुतुब’ को एक ‘धुरी’, ‘अक्ष’, ‘केन्द्र बिंदु’ या ‘स्तम्भ या खम्भा’ कहा जाता है, जिससे साफ ज़ाहिर होता है कि इस मीनार/टॉवर का इस्तेमाल खगोलीय गतिविधियों के लिए किया जाता रहा है। औपनिवेशिक और वांमपंथी इतिहासकारों ने इसे कुतुबद्दीन के साथ जोड़ दिया, और इस मीनार को कुतुब मीनार के नाम से प्रचारित कर दिया। हालांकि, इसे महज संयोग ही कहा जा सकता है।


Advertisement

आपके विचार


  • Advertisement