जल्लीकट्टू से चर्चा में आया कंबाला, प्रतिबंध हटाने को लेकर बड़े आंदोलन की तैयारी

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Updated on 23 Jan, 2017 at 10:14 am

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जल्लीकट्टू पर से प्रतिबंधन हटाने को लेकर चल रहे जनआंदोलन के बीच अब सालाना भैंसा दौड़ ‘कंबाला’ से प्रतिबंध हटाने की मांग शुरू हो गई है। इस खेल का आयोजन कर्नाटक में तटीय जिलों के दलदली खेतों में होता रहा है, लेकिन कथित तौर पर पशु अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था PETA की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कर्नाटक हाई कोर्ट ने कंबाला पर रोक लगाने का फैसला सुनाया था।

अब तमिलनाडु में जल्लीकट्टू उत्सव मनाने का रास्ता साफ होने के बाद कर्नाटक में भी इस खेल के आयोजन की मांग तेज हो गई है। इस आदोलन को एक रणनीति और नई दिशा देने के लिए मेंगलुरू में एक बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों की संख्या में लोगों ने भाग लिया। इसके आयोजन की मांग न केवल धरातल पर चल रहा है, बल्कि सोशल मीडिया पर भी लोग आगे आ रहे हैं।

कंबाला समिति अध्यक्ष अशोक राय कहते हैंः

कंबाला के लिए भी इजाजत मिलनी चाहिए क्योंकि इसमें किसी तरह की हिंसा नहीं होती। यह हमारी सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा है। अगले सप्ताह बुधवार या गुरुवार को हम लोग क्षेत्र में आंदोलन छेड़ने की रणनीति बना रहे हैं।


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इस संबंध में कंबाला के आयोजन पर कर्नाटक उच्च न्यायालय के स्थगन को हटाने के लिए एक अंतरिम याचिका भी दायर की है।

इस संबंध में कंबाला कमेटी के सदस्य पी.आर. शेट्टी कहते हैंः

PETA की गलत भावनाओं के चलते कंबाला के आयोजन में बाधाएं आई हैं। हमें भरोसा है कि हम इस मामले में कानूनी जीत हासिल करेंगे। कंबाला और जलीकट्टू में बड़ा अंतर है।

गौरतलब है कि पिछले साल नवंबर महीने में PETA की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कर्नाटक हाई कोर्ट ने कंबाला पर रोक लगाने का फैसला सुनाया था।

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