भोलेनाथ से लेकर भगवान राम तक के पास थे ये शक्तिशाली दिव्य धनुष

4:11 pm 24 May, 2018

Advertisement

भारत में धनुर्विद्या का इतिहास गौरवशाली रहा है। प्रचीन काल में भारत की अनेकों विद्याओं में से धनुर्विद्या भी एक थी। भारत में एक से बढ़कर एक धनुर्धर हुए हैं, जिनके पास विशेष प्रकार के धनुष-बाण हुआ करते थे। इनमें कुछ ऐसे दिव्य धनुष  भी थे, जिनकी शक्तियां अपार  थीं। ऐसे ही कुछ दिव्य धनुषों पर डालते है एक नजर।

पिनाक

दिव्य धनुषों में सबसे पहला नाम शिव के पिनाक का आता है। इसे सबसे शक्तिशाली धनुष माना जाता है। भोलेनाथ ने अपने इस धनुष से त्रिपुरासुर की तीनों नगरियों को ध्वस्त कर दिया था। शिव पुराण में भगवान शंकर के इस दिव्य धनुष का विस्तृत उल्लेख है। कहा जाता है कि शिव के इस धनुष की टंकार से ही बादल फट जाते थे। उल्लेखनीय है कि राजा दक्ष के यज्ञ में यज्ञ का भाग न मिलने से भोलेनाथ क्रोधित हो उठे थे। इसके बाद उन्होंने इससे देवताओं को नष्ट करने की ठानी थी। देवताओं ने उनका गुस्सा शांत कराया, जिसके बाद उन्होंने इस धनुष को देवताओं को सौंप दिया था।

 

प्राचीन काल के दिव्य धनुष (Powerful bows of lords in ancient times)

blogspot


Advertisement

 

कोदंड

भगवान राम को सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर माना जाता है। श्रीराम के पास कोदंड धनुष था, जिसके चलते उन्हें भी कोदंड कहा जाता है। इस चमत्कारी व दिव्य धनुष को हर कोई धारण नहीं कर सकता था। कहा जाता है कि श्रीराम के इस धनुष से निकला बाण लक्ष्य को भेद कर ही वापस लौटता था।

 

 

सारंग

ये मिथक आज भी स्थापित है कि महाभारत काल में अर्जुन ही सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर थे, लेकिन वास्ताव में ऐसा नहीं है। धनुर्विद्या में कृष्ण अर्जुन से कहीं आगे थे और यह बात तब सिद्ध हुई थी जब भद्रदेश की राजकुमारी लक्ष्मणा के स्वंयवर में कृष्ण ने भाग लिया था। कृष्ण के साथ प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए कर्ण, अर्जुन सहित कई अन्य सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर भी आए थे, लेकिन श्रीकृष्ण ने अपने इस दिव्य धनुष से सबको पछाड़ कर लक्ष्मणा से विवाह किया। उनके धनुष का नाम सारंग था।

 



 

गाण्डीव

महाभारत काल में अर्जुन के धनुष की टंकार से पूरा युद्ध क्षेत्र गूंज उठता था। अर्जुन के धनुष का नाम गाण्डीव था। महाभारत काल के इस सबसे प्रसिद्ध धनुष से अर्जुन ने कौरवों की विशाल सेना को हराकर विजय प्राप्त की थी। विष्णु भगवान से शिव और फिर वरुण देव से इस दिव्य धनुष को अर्जुन ने प्राप्त किया था।

 

 

विजय

कर्ण की धनुर्विद्या में बुहत बल था। कर्ण के पास विजय नामक दिव्य धनुष था, जिसे उसने भगवान परशुराम से आशीर्वाद-स्वरूप प्राप्त किया था। कर्ण को अपने इस विजय नामधारी धनुष के कारण पूरी दुनिया में अजेय माना जाता था।

 

प्राचीन काल के दिव्य धनुष (Powerful bows of lords in ancient times)

logicalhindu


Advertisement

आपके विचार


  • Advertisement