अंडमान निकोबार की राजधानी पोर्ट ब्लेयर हुई खुले में शौच से मुक्त

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Updated on 6 Oct, 2017 at 3:24 pm

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अक्सर सुनामी या भूकंप से सुर्खियों में आने वाला अंडमान निकोबार इस बार एक सकारात्मक खबर से सुर्खियां बटोर रहा है। अपने प्राकृतिक सौंदर्य, विशाल व मनमोहक समुद्रतटों से सैलानियों का आकर्षण बना ये द्वीपसमूह इस बार अपने स्वच्छता अभियान की वजह से चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

2 अक्टूबर को जहां देश में महात्मा गांधी की जयंती के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान के तीन साल पूरे हुए, उस दिन अंडमान निकोबार द्वीप ने भारत के स्वच्छ होने के सपने को अमली जामा पहनाया।

जहां अक्सर सरकार और आम लोगों के बीच सामंजस्य बिठाने को लेकर प्रयत्न किये जाते हैं, वहीं पोर्ट ब्लेयर म्यूनिसिपल काउंसिल (पीबीएमसी) ने आम नागरिकों के साथ मिलकर स्वच्छ भारत अभियान और महात्मा गांधी के स्वच्छता सत्याग्रह के संकल्प को साकार कर दिखाया है। 2 अक्टूबर को अंडमान निकोबार की राजधानी पोर्ट ब्लेयर को पूरी तरह से खुले में शौच से मुक्त द्वीप घोषित किया गया है।


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PBMC ने 2016 में पोर्ट ब्लेयर और आस-पास के क्षेत्रों में खुले शौच की जानकारी जुटाने के लिए एक सर्वेक्षण किया था। सर्वेक्षण के मुताबिक, क्षेत्र के दूरदराज गांवों में खुले में शौच करने की समस्या देखी गई। सर्वे में पता चला कि 7000 लोगों के घरों में स्वच्छ शौचालय की सुविधा नहीं है, वहीं 1600 लोगों के घरों में तो शौचालय है ही नहीं।

सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट (SWM), PBMC के एग्जीक्यूटिव इंजिनियर अविनाश कुमार सिंह ने बताया :

“PBMC ने फरवरी-मार्च 2016 में शहर में एक सर्वे किया था, जिससे खुले में शौच करने वाले लोगों के बारे में पता लग सके। यह सर्वे सभी घरों और संस्थागत भवनों पर किया गया था। सर्वे में खुले में शौच की समस्या गांवों और दूरदराज के इलाकों में बड़े पैमाने में सामने आईं।”

इसके बाद सरकार ने जिन लोगों के घर में शौचालय नहीं थे, उन्हें सुलभ शौचालय बनाने के लिए 14000 रुपए दिए।

यही नहीं, नगर निगम ने 48 ऐसे क्षेत्रों का चयन किया जहां लोग खुले में शौच करने जाते थे, वहां 256 कम्यूनिटी टॉयलेट का निर्माण करवाया। नगर निगम के अधिकारियों के मुताबिक, केंद्र ने इसके लिए 2.5 करोड़ रुपये मंजूर किए थे, जिसके परिणामस्वरूप यह केंद्रशासित क्षेत्र अब खुले में शौच से मुक्त बन गया है।

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