क्या आपने कभी सोचा है आखिर क्यों गुंबदनुमा बनाए जाते हैं मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारे

Updated on 13 Nov, 2018 at 10:35 am

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दुनियाभर में भारत को अध्यात्म और धर्म के लिए जाना जाता है। इस देश में भगवान, अल्लाह और प्रभु ईसा मसीह पर विश्वास रखने वाले लोगों की संख्या दूसरे देशों से कहीं ज़्यादा है। हम में से ज़्यादातर लोगों ने ज़िंदगी में कई बार मंदिर, मस्जिद या गुरुद्वारे के दर्शन किए होंगे। लेकिन क्या कभी आपने मंदिर, मस्जिद या गुरुद्वारे के गुंबदनुमा आकार के बारे में सोचा है? भले ही आपने कितने ही मंदिर-मस्जिद, गुरूद्वारा, चर्च क्यों न देखें हो, लेकिन एक चीज़ जो सब में समान होती है वो है मंदिर की गुंबदनुमा छत।

 

जिन लोगों ने कभी इस पर ध्यान दिया होगा उन्होंने ये बात ज़रूर जाननी चाही होगी आखिर धार्मिक स्थलों का ऊपरी हिस्सा गुंबदनुमा क्यों बनाया जाता है। हालांकि बहुत से ऐसे लोग भी होंगे जिन्हें इस बारे में कुछ भी नहीं मालूम होगा।

 


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मदिरों, मस्जिदों और गुरुद्वारों को गुंबदनुमा बनाने के पीछे केवल आस्था नहीं है, बल्कि इसके कुछ वैज्ञानिक कारण भी हैं। इन गुंबदनुमा छत का संबंध आपकी प्रार्थना से है। जिस वक्त कोई व्यक्ति ईश्वर की आराधना कर रहा होता है तो उसके मुख से ध्वनि तरंगे निकलती हैं। अगर कोई व्यक्ति खुले में बैठकर ध्वनि तरंगे निकालेगा तो उसकी आवाज़ कहीं खो सकती हैं। ऐसी स्थिति में किसी भी व्यक्ति को ये लग सकता है जैसे ईश्वर उसकी आराधना सुन ही नहीं रहे। जी हां, हमारी पुकार ब्रह्मांड से लौटकर हम तक पहुंच सके इसलिए इन स्थलों को गुंबदनुमा बनाया जाता है।

 

 

ये ठीक वैसा ही है जैसा पृथ्वी के लिए आकाश। जिस तरह धरती को आकाश ने चारों ओर से घेर रखा है, ठीक वैसे ही  मंदिर, मस्जिद और चर्चों में छोटा आकाश बनाया जाता है। इसके नीचे आप जो भी प्रार्थनाएं करते हैं, गुम्बद उसे वापस आपको लौटा देता है। वहीं अगर आप खुले आसमान के नीचे बैठकर सामान्य तौर पर प्रार्थना करेंगे तो आपकी पृर्थना ब्रह्मांड में विलीन हो जाएगी।


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