देश की आबोहवा में घुल चुका है प्रदूषण का जहर, भारतीयों की औसत आयु में आई इतनी कमी

Updated on 24 Aug, 2018 at 10:13 am

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भारत की हवा में घुल रहा प्रदूषण जीवन के लिए एक बड़ा खतरा बनता जा रहा है। बढ़ते प्रदूषण की वजह से लोगों को सांस संबंधी समस्याएं होने लगी है। देश की हवा में सांस लेना अब खतरे से खाली नहीं है। यहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन के तय मानकों से कहीं ज्यादा है। प्रदूषण की स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सरकार फौरी तौर पर कुछ कदम जरूर उठाती  है, लेकिन वो देश की आबोहवा साफ करने में नाकाफी साबित होते हैं, जिसका खामियाजा आखिरकार लोगों को ही भुगतना पड़ता है।

 

 


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हवा में फैल रहा प्रदूषण का जहर न सिर्फ आपको समय-समय पर बीमार बनाता है, बल्कि इससे हमारे देश के लोगों की औसत उम्र भी घटती जा रही है। हाल ही में हुए एक शोध में पता लगा है कि प्रदूषण की वजह से भारतीयों की औसत आयु डेढ़ साल तक कम हो चुकी है।

 

 

ऐसा पहली बार हुआ है कि वायु प्रदूषण और जीवन अवधि पर एक संयुक्त रिपोर्ट तैयार की गई है, जिसमें इस बात पर गहन अध्ययन किया गया है कि प्रदूषण किस तरह व्यक्ति की आयु पर असर डालता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि हवा की गुणवत्ता में सुधार लाया जाए तो मनुष्य की औसत आयु को बढ़ाया जा सकता है।

हाल ही में अमेरिका के ऑस्टिन स्थित टेक्सास विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने वायुमंडल में पाए जाने वाले 2.5 माइक्रोन से छोटे कण (पीएम) से वायु प्रदूषण का अध्ययन किया, जिसमें ये बात सामने आई कि हवा में मौजूद ये सूक्ष्म कण इंसान के फेफड़ों में प्रवेश कर सकते है, जिससे दिल का दौरा, स्ट्रोक और कैंसर जैसी घातक बीमारी भी हो सकती है।



 

 

बता दें कि पीएम 2.5 प्रूषण कारों, ट्रकों, खेती, औद्योगिक उत्सर्जन और बिजली संयंत्रों से निकलने वाले घुंए से होता है। दुनियाभर में इस प्रदूषण से प्रभावित देशों में बांग्लादेश, मिस्र,पाकिस्तान, सऊदी अरब, नाइजीरिया और चीन शामिल है। वहीं, वायु प्रदूषण से भारत में व्यक्ति की औसत आयु  1.53 वर्ष तक कम होती है।

 

 


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