करुणानिधि के प्रशंसक उन्हें ‘कलाईनार’ कहकर बुलाते थे, जानिए उनसे जुड़ी कई दिलचस्प बातें

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Updated on 8 Aug, 2018 at 4:27 pm

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तमिलनाडु के पांच बार मुख्यमंत्री  और 12 बार विधानसभा सदस्य रहे डीएमके प्रमुख करुणानिधि का 7 जुलाई की शाम चेन्नई के कावेरी हॉस्पिटल में 94 साल की अवस्था में निधन हो गया। वह लंबे से बीमार चल रहे थे। तमिल राजनीति का केंद्र रहे डीएमके नेता के निधन के बाद राज्य में शोक की लहर है। राज्य में एक दिन का अवकाश और सात दिन का शोक घोषित किया गया है।

कलम का जादूगर और तमिल राजनीति के महारथी करुणानिधि का वास्तविक नाम दक्षिणमूर्ति था। उनका जन्म 3 जून 1924 को हुआ था। भारतीय राजनीति में करुणानिधि एक अलग ही पहचान रखते थे। एक राजनेता के साथ करुणानिधि तमिल सिनेमा जगत के एक नाटककार और पटकथा लेखक भी रहे। उनके प्रशंसक उन्हें कलाईनार कहकर बुलाते थे, जिसका मतलब ‘तमिल कला का विद्वान’ होता है।

 

आइए जानते हैं ‘कलाईनार’ करुणानिधि से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें:

 

महज 14 साल की उम्र में राजनीति में कदम रखा

 

करुणानिधि ने महज 14 साल की उम्र में जस्टिस पार्टी जॉइन की थी। दक्षिण भारत में हिंदी विरोध पर मुखर होते हुए करुणानिधि हिंदी हटाओ आंदोलन में शामिल हो गए। 1937 में स्कूलों में हिंदी को अनिवार्य करने पर बड़ी संख्या में युवाओं ने विरोध किया, उनमें से करुणानिधि एक थे। इसके बाद उन्होंने तमिल भाषा को हथियार बनाया और तमिल में भी नाटक और स्क्रिप्ट लिखने लगे। एक बार राजीनीति में कदम रखने के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

12 विधानसभा चुनाव लड़े और हर चुनाव जीता

 

पहली बार करुणानिधि ने 1969 में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। 1969 में डीएमके के संस्थापक सीएन अन्नादुरई की मौत के बाद से करुणानिधि के हाथ में पार्टी की कमान थी। करुणानिधि को तिरुचिरापल्ली जिले के कुलिथालाई विधानसभा से 1957 में तमिलनाडु विधानसभा के लिए पहली बार चुना गया था। 1961 में वो डीएमके कोषाध्यक्ष बने और 1962 में राज्य विधानसभा में विपक्ष के उपनेता बने। 1967 में डीएमके जब सत्ता में आई तब करुणानिधि सार्वजनिक कार्य मंत्री बने। अपने प्रभावशाली करियर के दौरान उन्होंने 12 विधानसभा चुनाव लड़े और हर चुनाव जीता। 1969 में करुणा पहली बार राज्य के सीएम बने थे। मुख्यमंत्री के तौर पर आखिरी बार उन्होंने 2003 में शपथ ली थी।

कई फिल्मों की कहानियां और डायलॉग लिखे

 


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करुणानिधि तमिल साहित्य में अपने योगदान के लिए मशहूर हैं। उनके योगदान में कविताएं, चिट्ठियां, पटकथाएं, उपन्यास, जीवनी, ऐतिहासिक उपन्यास, मंच नाटक, संवाद, गाने इत्यादि शामिल हैं।

करुणानिधि ने 1947 से लेकर 2011 तक करीब 64 सालों तक फिल्मों के लिए लेखन किया। फिल्मों के अलावा उन्होंने टीवी सीरियल के लिए भी स्क्रिप्ट और डायलॉग लिखे। कहानीकार और पटकथा लेखक के रूप में करुणानिधि ने तमिल सिनेमा को नया रूप दिया। उन्होंने सबसे पहले तमिल फिल्म ‘राजाकुमारी’ के लिए डायलॉग लिखे। इस पेशे में भी करुणानिधि को जबरदस्त कामयाबी मिली। सबसे ख़ास बात ये थी कि करुणानिधि अपने डायलॉग में सामाजिक न्याय को पुरजोर पर बढ़ावा देते थे।

 

1952 में आई शिवाजी गणेशन की सुपरहिट फिल्म ‘पराशक्ति’ की कहानी और पटकथा करुणानिधि ने ही लिखी थी। फिल्म ‘पराशक्ति’ में करुणानिधि के लिखे जानदार डायलॉग ने इसे तमिल फिल्मों में मील का पत्थर बना दिया। फिल्म के शानदार डायलॉग के जरिए अंधविश्वास, धार्मिक कट्टरता और उस वक्त की सामाजिक व्यवस्था पर सवाल उठाए गए थे।

जयललिता से थी राजनीतिक दुश्मनी, लेकिन एक मुद्दे पर दोनों थे एकमत

 

राजनीति में एक-दूसरे के धुर विरोधी रहे एम करुणानिधि और जे जयललिता हमेशा एक-दूसरे के किसी फैसले का विरोध करते नजर आते थे। दोनों की राजनीतिक दुश्मनी जगजाहिर थी। हालांकि, एक मामला ऐसा था, जिसने दोनों को साथ लाकर खड़ा कर दिया था। दोनों का ही तमिलनाडु को देश का दूसरा सबसे अमीर राज्य बनाने का लक्ष्य था। इसके लिए जब औद्योगीकरण की बात हुई तो दोनों नेताओं ने इस पर अपनी रजामंदी दी। यह सहमति तमिलनाडु की किस्मत बदलने जैसे रही।

कई राजनीतिक रिकॉर्ड किए अपने नाम

उन्होंने अपने 60 साल के राजनीतिक करियर में अपनी भागीदारी वाले हर चुनाव में अपनी सीट जीतने का रिकॉर्ड बनाया। 2004 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने तमिलनाडु और पुदुचेरी में डीएमके के नेतृत्व वाली डीपीए (यूपीए और वामपंथी दल) का नेतृत्व किया और लोकसभा की सभी 40 सीटों को जीत लिया। इसके बाद 2009 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने डीएमके द्वारा जीती गयी सीटों की संख्या को 16 से बढ़ाकर 18 कर दिया और तमिलनाडु और पुदुचेरी में यूपीए का नेतृत्व कर बहुत छोटे गठबंधन के बावजूद 28 सीटों पर विजय प्राप्त की।

तीन शादियां की

 

करुणानिधि ने तीन शादियां कीं। उनकी पहली पत्नी पद्मावती, दूसरी पत्नी दयालु अम्माल और तीसरी पत्नी रजति अम्माल हैं। उनकी पहली पत्नी का इस दुनिया में नहीं है। उनके चार बेटे और दो बेटियां हैं। एमके मुथू पद्मावती के बेटे हैं, जबकि एमके अलागिरी, एमके स्टालिन, एमके तमिलरासू और बेटी सेल्वी, दयालु अम्मल की संतानें हैं। उनकी तीसरी पत्नी रजति अम्माल की बेटी कनिमोझी हैं।

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