58 शादियां कर चुके हैं यह सांसद, बेटी की क्लासमेट से भी कर ली थी शादी

author image
Updated on 15 Apr, 2018 at 11:03 am

Advertisement

हमारे देश के ज्यादातर सांसद अपने ठाठ-बाट और राजश्री अंदाज के लिए जाने जाते हैं। जनता को रोटी, कपड़ा, मकान मिले न मिले, लेकिन उनकी तिजोरियां हमेशा भरी रहती हैं।

 

क्यों यही छवि है न आपकी भी देश के ज्यादातार सांसदों को लेकर? लेकिन एक सांसद ऐसा भी है, जो आज भी दो कमरों के घर में रहता है।

 

source


Advertisement

 

यहां हम झारखंड राज्य के पहले विधानसभा उपाध्यक्ष बनने का गौरव प्राप्त कर चुके बागुन सुम्ब्रुई की बात कर रहे हैं। आज 94 साल के हो चुके बागुन किसी भी मौसम में, चाहे गर्मी, सर्दी या बरसात, बस एक धोती लपेटकर ही रहते हैं।

 

उनके बारे में कहा जाता है कि उन्होंने साल 1942 से कमर के ऊपर कभी कपड़े नहीं पहने। यहां तक कि वह धोती पहनकर ही ससंद भवन और विधानसभा जाते थे। आज भी लोग उनकी सादगी और सहजता की प्रशंसा करते नहीं थकते।

 

 

हालांकि, उनसे जुड़ी एक ऐसी बात भी है जो शायद ही आपको पता हो। पांच बार सांसद, चार बार विधायक और मंत्री रहे बागुन सुम्ब्रुई के बारे में बताया जाता है कि उन्होंने 58 शादियां की हैं। आलम ये है कि उम्र के इस पड़ाव पर वह कई बीवियों के नाम तक भूल चुके हैं।

 

 

उनकी पहली शादी साल 1942 में हुई थी। इसके बाद उन्होंने कई और लड़कियों से शादी की, लेकिन इससे बागुन को कभी किसी तरह की कोई मुश्किल नहीं हुई। बता दें कि आदिवासी समुदाय में एक से ज्यादा पत्नियां रखने पर कोई रोक नहीं है। उनके अब कई बच्चे और पोते-पोतियां हैं।

 

बागुन के लिए 16108 शादियां करने वाले भगवान कृष्ण प्रेरणा का स्त्रोत हैं। उनका कहना है कि उन्होंने भी कृष्ण की तरह वंचित-शोषित महिलाओं की मदद करने के लिए उन्हें अपना नाम दिया।

 

 

बागुन ने बहुत पहले यह भी कहा था कि वह अपने जीवनकाल में कभी किसी महिला के पीछे नहीं भागे। जो उनसे शादी करना चाहती थीं, वह खुद उनके पास आईं। वह उन्हें निराश नहीं करना चाहते थे। इसलिए उन्होंने इतनी शादियां की।

 

 

उन्होंने इतनी शादियों के बारे में खुलासा करते हुए कहा थाः

 

“पहले यहां ‘हाट’ या ‘मेले’ लगा करते थे। इनमें शामिल होने के लिए आने वाले कारोबारी आदिवासी लड़कियों का शोषण करते थे। इसकी वजह से कई लड़कियां प्रेग्नेंट हो जाती थीं। बहुत झमेला होता था। ऐसी लड़कियों को मैंने अपना नाम देना शुरू किया और उनको सहारा दिया। कई लड़कियों ने मुझे पति बताकर नौकरी की। उनको कोई साथी मिला तो मुझे छोड़कर भी चली गईं। कई लड़कियां जिंदगी में आईं और गईं। कितनों का नाम याद रखें? मुझे न किसी के आने पर ऐतराज था और न ही किसी के जाने पर।”

 

साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि ज्यादातर आदिवासी महिलाओं के शादी के प्रस्ताव उन्हें तब आए जब वह सांसद चुने जाने लगे। इसी दौर में उन्होंने सबसे ज्यादा शादियां रचाई। इन्हीं में से एक थीं अनीता कुमारी।

 

पत्नी अनीता कुमारी के साथ बागुन सुम्ब्रुई source

 

अनीता कुमारी, बागुन की पहली पत्नी की बेटी की क्लासमेट थीं। स्कूल में टीचर रह चुकीं अनीता ने बताया कि उनकी दिलचस्पी राजनीति में अधिक थी। वहीं, बागुन बाबू हमेशा शिक्षा को बढ़ावा देने के कार्यों में लगे रहते थे। यही वजह रही कि उन्होंने अपने गुरु और गाइड को ही अपना जीवनसाथी चुना और उनसे शादी कर ली।

अपने स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव के चलते बागुन ने 2004 में जीत दर्ज करने के बाद कोई चुनाव नहीं लड़ा। अब वह उम्र के इस पड़ाव में स्थानीय लोगों की समस्याएं सुनते हैं और उनका समाधान करते हैं।

 

source


Advertisement

आपके विचार


  • Advertisement