सालों तक इस बीमारी से लड़े थे भारत के लोग, अब एक बार फ़िर लौट आया है ये घातक रोग

Updated on 29 Sep, 2018 at 6:07 pm

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एक समय था जब भारत पोलियो की गिरफ़्त में जकड़ा हुआ था। ये बीमारी हर साल देशभर के लगभग 50,000 बच्चों को अपना शिकार बना लिया करती थी। लंबे समय तक पोलियो की चपेट में रहे भारत ने 90 के दशक में इस गंभीर बीमारी को जड़ से खत्म करने का संकल्प लिया। देश को पोलियो मुक्त बनाने के लिए युद्ध स्तर पर अभियान छेड़ा गया। आखिरकार 27 मार्च 2014 को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने आधिकारिक तौर पर भारत को पोलियो मुक्त देश घोषित कर दिया। इसके साथ ही भारत, दक्षिण पूर्व एशिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया, जिसे वाइल्ड पोलियो विषाणु से मुक्त प्रमाणित किया गया।

 

 

लेकिन पोलियो के खिलाफ चली लंबी लड़ाई शायद एक बार फ़िर शुरू होने वाली है। खबर है कि भारत में पोलियो ने दोबारा दस्तक दे दी है। उत्तर प्रदेश के गाज़ियाबाद स्थित मेडिकल कंपनी बायॉमेड की बनी ओरल पोलियो वैक्सीन में टाइप-2 वायरस पाए गए हैं। इसे देख पोलियो के भारत में दोबारा आने की संभावना जताई जा रही है।

 

गाज़ियाबाद की इस कंपनी द्वारा बनाई गई वैक्सीन महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में सप्लाई की जाती है, जिसके चलते दोनों राज्यों को अलर्ट पर रखा गया है।

 

 


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दरअसल, यूपी सरकार के पोलियो वैक्सिनेशन अभियान के लिए बायॉमेड कंपनी वैक्सीन का वितरण कर रही थी, इस बीच उत्तर प्रदेश के कुछ बच्चों के मल में ये वायरस पाए गए तो सैंपल्स को जांच के लिए भेजा गया। इस जांच में इस बात की पुष्टि हुई की बच्चों के मल में टाइप-2 पोलियो वायरस मौजूद है।

 

 

मामला सामने आते ही स्वास्थ्य मंत्रालय सहित संबंधित विभाग ने कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। इस जांच में पुष्टि होने के बाद बायॉमेड के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई, जिसके बाद कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर को गिरफ्तार कर लिया गया।

 

गौरतलब है कि यूपी सरकार ने पहले ही ये आदेश जारी कर रखा था कि 25 अप्रैल 2016 तक पोलियो टाइप-2 वायरस को नष्ट कर दिया जाए, बावजूद इसके ये वायरस बचा रह गया।

 

 

बता दें कि भारत में पोलियो का आखिरी मामला 16 जनवरी, 2011 को पश्चिम बंगाल में सामने आया था।

 

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